महाराष्ट्र में MVA के भीतर सियासी खींचातानी तेज
Rajya Sabha Election In Maharashtra: महाराष्ट्र में राज्यसभा और विधान परिषद के आगामी चुनावों ने विपक्षी खेमे की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महा विकास अघाड़ी (MVA) के सहयोगी दल शिवसेना (UBT), कांग्रेस और NCP (SP) के बीच सीट बंटवारे को लेकर अंदरखाने खींचतान शुरू हो गई है, जिसकी आहट अब खुलकर सुनाई देने लगी है।
महाराष्ट्र से राज्यसभा की 7 सीटें जल्द खाली होने जा रही हैं। मौजूदा समीकरणों के मुताबिक, इनमें दो सीटें कांग्रेस, एक शिवसेना (UBT) और एक NCP (SP) प्रमुख शरद पवार के पास हैं। लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में NDA की मजबूत जीत के बाद स्थिति बदल गई है। नए नंबर गेम के अनुसार, इन सात में से छह सीटों पर NDA की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जिससे विपक्ष के खाते में केवल एक सीट बचती दिख रही है।
सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे कांग्रेस नेतृत्व से बातचीत के लिए दिल्ली जाने की तैयारी में हैं। हालांकि शुरुआती बैठकों में NCP (SP) के शामिल न होने से सियासी गलियारों में सवाल उठने लगे हैं क्या MVA के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है?
16 मार्च को 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। महाराष्ट्र से रिटायर होने वाले सांसदों में शरद पवार, शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी, कांग्रेस की डॉ. फौजिया तहसीन अहमद खान और रजनी पाटिल शामिल हैं। वहीं BJP और NDA की ओर से डॉ. भगवत कराड, धैर्यशील माने और रामदास अठावले का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।
हर राज्यसभा सीट जीतने के लिए 36 विधायकों के वोट जरूरी हैं। संख्याबल के लिहाज से MVA आराम से एक सीट निकाल सकती है, लेकिन सवाल यह है वह सीट किसे मिले?
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा है कि सभी सहयोगी आपसी सलाह से फैसला करेंगे। इससे पहले आदित्य ठाकरे ने दावा किया था कि विधानसभा में संख्या के आधार पर शिवसेना (UBT) की दावेदारी बनती है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि उसे या तो राज्यसभा सीट मिले या विधान परिषद की।
हालांकि संजय राउत ने मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा, “राजनीति में शुरुआती मतभेद स्वाभाविक हैं। फैसला बातचीत से होगा। कांग्रेस का निर्णय दिल्ली में होता है, जबकि हमारा और NCP (SP) का मुंबई में। आगे बहुत कुछ शरद पवार की रणनीति पर निर्भर करेगा।”
288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना (UBT) के 20, कांग्रेस के 16 और NCP (SP) के 10 विधायक हैं यानी कुल 46 MLA। इसी ताकत के दम पर MVA एक राज्यसभा और एक विधान परिषद सीट जीतने की स्थिति में है।
राज्यसभा के साथ-साथ विधान परिषद की 9 सीटें भी खाली हो रही हैं। इनमें से एक सीट फिलहाल उद्धव ठाकरे के पास है। हर सीट के लिए 29 वोट चाहिए, और यहां भी MVA के पास पर्याप्त संख्या है। कांग्रेस जहां काउंसिल सीट पर दावा ठोक रही है, वहीं शिवसेना (UBT) का कहना है कि पार्टी प्रमुख होने के नाते उद्धव ठाकरे अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं।
सीट भले ही एक हो, लेकिन दावेदार कई हैं। राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव से पहले MVA के भीतर चल रही यह खींचतान तय करेगी कि विपक्ष एकजुट दिखेगा या सियासी समीकरण और उलझेंगे।
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