Cover Story Top

विवादों में PNC इंफ्राटेक, CBI जांच के बीच NHAI ने सौंपा ₹3,500 करोड़ का पोजेक्ट

PNC Infratech Controversy: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली PNC इंफ्राटेक एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कंपनी पर भ्रष्टाचार और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े गंभीर आरोप लग चुके हैं। इसके बावजूद NHAI ने उसे करीब ₹3,483 करोड़ के दो नए हाईवे प्रोजेक्ट दिए हैं। इससे कंपनी के पुराने रिकॉर्ड और नए ठेकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

इनमें करीब ₹1,728 करोड़ का बाराबंकी-मुस्तफाबाद फोर लेन और ₹1,755 करोड़ का मुस्तफाबाद-बिसवां फोर लेन प्रोजेक्ट शामिल है। दोनों प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश में NH-927 पर बनने हैं।

BJP सांसद नवीन जैन से कंपनी का पुराना संबंध

इस मामले में भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन का कंपनी से पुराना संबंध भी चर्चा में है। कंपनी की शेयरहोल्डिंग और प्रमोटर समूह से उनका नाम जुड़ा रहा है। वह PNC इंफ्राटेक में व्होल-टाइम डायरेक्टर रह चुके हैं। बाद में राजनीति में सक्रिय होने के बाद वह राज्यसभा सांसद बने। कंपनी का रोजमर्रा का संचालन फिलहाल उनके भाइयों के हाथों में बताया जाता है। इसी कनेक्शन के चलते राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या राजनीतिक प्रभाव के कारण कंपनी को विवादों के बावजूद नए प्रोजेक्ट मिल रहे हैं।

CBI जांच से लेकर निर्माण गुणवत्ता तक सवाल

PNC इंफ्राटेक और उसके अधिकारियों पर पहले भी आरोप लग चुके हैं। 2024 में CBI ने हाईवे प्रोजेक्ट्स से जुड़े कथित रिश्वत मामले में FIR दर्ज की थी, जिसमें NHAI के एक वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी हुई थी और जांच कंपनी से जुड़े अधिकारियों तक भी पहुंची थी। उत्तर प्रदेश के कथित अवैध खनन मामले में कंपनी पर करीब ₹104 करोड़ का जुर्माना लगाए जाने की बात भी सामने आई। इससे पहले लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के करीब 56 किलोमीटर हिस्से के निर्माण में घटिया सामग्री और गुणवत्ता को लेकर शिकायतों की जांच हुई थी।

सड़क सुखाने के लिए टेबल फैन का मामला

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता पर उस समय भी सवाल उठे, जब सड़क पर नमी सुखाने के लिए घरेलू टेबल फैन इस्तेमाल किए जाने की तस्वीरें सामने आईं। सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने X पर तस्वीरें साझा कर सरकार और कंपनी पर निशाना साधा था।

पुराने रिकॉर्ड को नजरअंदाज करने का सवाल

अब मुख्य सवाल यह है कि जब कंपनी के पुराने प्रोजेक्ट, कथित गुणवत्ता संबंधी खामियां और CBI जांच सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं, तो नए ठेके देने से पहले इनका कितना मूल्यांकन किया गया। मामला बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता के साथ-साथ प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है।

ये भी पढ़े: CJP के दबाव के बीच ऑडिट में खुलासा, राजस्थान के 611 स्कूलों के पास भवन नहीं

Tanisha Verma

Recent Posts

IIT बॉम्बे छात्र की मौत के बाद माता-पिता का अनशन, ‘प्रताड़ित करने वालों’ पर कार्रवाई की मांग

IIT Bombay Student Death: IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय BTech छात्र के माता-पिता ने मुंबई…

10 hours ago

‘वोट चोरी’ से होती है ‘कानून चोरी’: राहुल गांधी बोले- सांसदों के बनाए कानून भी अवैध

Rahul Gandhi Vote Chori Allegation: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य…

11 hours ago

AI की रफ्तार बढ़ी तो बढ़ेगा ई-कचरा, 2050 तक हर साल 6.1 करोड़ टन तक निकल सकता है वेस्ट

AI E-Waste: दुनिया में AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग मशीनों…

12 hours ago

मेरठ सेंट्रल मार्केट के 650 व्यापारियों को राहत, सरकार लाएगी विशेष पुनर्वास नीति

Meerut: मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण से प्रभावित करीब 650 व्यापारियों को…

12 hours ago

गोवा में वोटर डिलीट करने के बाद नाम नहीं हो सका बहाल; EC ने Form 7 का दिया हवाला

ECINet Voter Deletion Rollback: चुनाव आयोग ने India Today को बताया कि ECINet सिस्टम में…

13 hours ago

‘देशभर में होगा प्रदर्शन’: CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे में की इस्तीफे की मांग

CJP Gyanesh Kumar Resignation Demand: नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर Cockroach Janta Party (CJP)…

13 hours ago