Punjab Jail Opioid Addiction: पंजाब की जेलों में नशे की समस्या को लेकर सामने आए आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे के अनुसार, करीब 44.5% कैदी ओपिओइड की लत के इलाज के लिए रजिस्टर्ड हैं। कपूरथला सेंट्रल जेल में 4,196 कैदियों में से 2,635 OOAT से जुड़े हैं। उम्र के लिहाज से 26-35 साल के 5,656 और 36-45 साल के 4,544 कैदी कार्यक्रम में हैं। 18 साल से कम उम्र का कोई कैदी इसमें रजिस्टर्ड नहीं है।
पंजाब में 2017 में हेरोइन के बढ़ते इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए Out-patient Opioid-Assisted Treatment (OOAT) शुरू हुआ था। इसमें Buprenorphine 2 mg और Naloxone 0.5 mg यानी BPNx दिया जाता है, जो विदड्रॉल लक्षण और क्रेविंग कम करता है, ओपिओइड के असर को रोकता और ओवरडोज का खतरा घटाता है। Naloxone इंजेक्शन के गलत इस्तेमाल को हतोत्साहित करता है। दोबारा लत लगने पर मनोचिकित्सक की सलाह से दवा फिर शुरू की जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने कैदियों को OOAT से जोड़ने के लिए SOP बनाया है। NAPDDR योजना के तहत पटियाला, बठिंडा, फिरोजपुर, फरीदकोट, लुधियाना, अमृतसर, कपूरथला और श्री गोइंदवाल साहिब की सेंट्रल जेलों में नशा-मुक्ति केंद्र भी बनाए गए हैं। सरकार का कहना है कि रिहाई के बाद भी इलाज, पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी के लिए सहायता दी जाएगी।
हाईकोर्ट ने 20 अगस्त को जून 2023 में मानसा के प्रशासनिक न्यायाधीश की रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया था। रिपोर्ट में कैदियों को Buprenorphine-Naloxone देने का उल्लेख था। इसके बाद ADGP जेल राजेश कुमार के जरिए सरकार ने जेलों में नशे और इलाज की व्यवस्था का विवरण दिया।
आंकड़ों के बाद ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान को लेकर विपक्ष हमलावर है। NCRB 2024 के अनुसार NDPS अपराध दर में पंजाब 29 मामले प्रति लाख आबादी के साथ देश में दूसरे स्थान पर रहा। राज्य में ओवरडोज से 2024 में 106 मौतें हुईं, जबकि 2023 में 89 और 2022 में 117 थीं। देशभर में ये मौतें 2022 में 681, 2023 में 654 और 2024 में 978 रहीं। बीजेपी नेता एचएस फूलका ने कहा कि जेल AAP सरकार के नियंत्रण में हैं और अंदर ड्रग्स नियंत्रित न हो तो ‘युद्ध’ का दावा कैसे सही है। कांग्रेस नेता चरनजीत सिंह चन्नी ने कथित ड्रग पैडलर-AAP नेता-पुलिस गठजोड़ तोड़ने की मांग की। परगट सिंह ने दावा किया कि 2022 से पहले नशा छुड़ाने वाली दवाओं की खपत करीब 1.17 करोड़ थी, जो बढ़कर 8.87 करोड़ हो गई। उनके मुताबिक इलाज लेने वाले कैदी करीब 600 से बढ़कर 3,400 और चार साल में दवाओं पर खर्च करीब 43.44 करोड़ रुपये हुआ। उन्होंने कहा कि केवल नशे के आदी लोगों को पकड़ने से सप्लाई नेटवर्क खत्म नहीं होगा। SAD नेता दलजीत चीमा की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि कैदी अपराधी होने के साथ नशे की बीमारी से भी जूझ सकते हैं, इसलिए उनका इलाज जरूरी है। उनका कहना है कि नशे की लत जेल के गेट पर खत्म नहीं होती और इसे बीमारी मानकर इलाज व पुनर्वास देना होगा। अब हाईकोर्ट के सामने आए आंकड़ों के बाद न्यायिक कार्रवाई और सरकार के अगले कदम पर नजर है।
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