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वादे की हत्या और हरियाली का कत्लेआम कटर मशीनों के शोर में दबा आदिवासियों का रुदन, जेएसपीएल का आश्वासन निकला सफेद झूठ!

Raigarh Forest Cutting Protest: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड स्थित नागरामुड़ा क्षेत्र में जंगलों की कटाई को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। बुधवार को जिंदल पावर लिमिटेड (JSPL) की परियोजना से जुड़े कर्मचारियों द्वारा जंगल में पेड़ों की कटाई शुरू किए जाने का स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय ने विरोध किया। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने पहले पेड़ों की कटाई नहीं करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब उसी क्षेत्र में मशीनों के जरिए कटाई शुरू कर दी गई है।

कटाई की सूचना मिलते ही जंगल पहुंचे ग्रामीण

स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह जंगल में मशीनों से पेड़ों की कटाई शुरू होने की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंच गए। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने कटाई का विरोध करते हुए जंगल में प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह जंगल उनकी आजीविका, संस्कृति और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

1 जुलाई के आश्वासन का दिया हवाला

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का दावा है कि इसी महीने 1 जुलाई को JSPL तमनार के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई नहीं की जाएगी। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने आंदोलन शांत कराने के लिए यह आश्वासन दिया था, लेकिन अब उसी वादे के विपरीत कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, इस संबंध में JSPL की ओर से ताजा घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ग्राम सभा की अनुमति को लेकर भी उठे सवाल

ग्रामीणों और आंदोलन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि पेड़ों की कटाई ग्राम सभा की उचित अनुमति के बिना शुरू की गई है। उनका कहना है कि अनुसूचित क्षेत्रों में लागू पेसा (PESA) कानून के तहत ग्राम सभा की सहमति महत्वपूर्ण होती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कटाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी आपत्तियों पर ध्यान देने के बजाय कंपनी की कार्रवाई को जारी रहने दिया। वहीं प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

पर्यावरण पर असर को लेकर चिंता

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रस्तावित परियोजना के कारण बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उनका दावा है कि इससे क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन, भूजल स्तर और जैव विविधता प्रभावित होगी। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जंगल उनके लिए केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि आजीविका का प्रमुख आधार हैं।

रोजगार और विस्थापन को लेकर बढ़ी चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के हजारों परिवार महुआ, तेंदूपत्ता, साल बीज, चिरौंजी और अन्य वनोपज पर निर्भर हैं। उनका आरोप है कि यदि जंगलों की कटाई जारी रही तो कई गांवों के लोगों के सामने आजीविका और विस्थापन का संकट खड़ा हो जाएगा। उनका कहना है कि आर्थिक मुआवजा जंगल और उससे जुड़े पारंपरिक जीवन का विकल्प नहीं हो सकता।

पहले भी हो चुका है विरोध प्रदर्शन

ग्रामीणों ने पिछले वर्ष क्षेत्र में हुए विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन और तेज हो सकता है। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

कंपनी और प्रशासन का पक्ष आना बाकी

खबर लिखे जाने तक पेड़ों की कटाई, ग्राम सभा की अनुमति और ग्रामीणों के आरोपों पर JSPL तथा जिला प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

रायगढ़ के नागरामुड़ा में जंगल कटाई को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। एक ओर ग्रामीण और आदिवासी समुदाय पर्यावरण, आजीविका और ग्राम सभा के अधिकारों का हवाला देते हुए विरोध कर रहे हैं, वहीं परियोजना से जुड़े कार्य जारी रहने के दावे भी सामने आए हैं। अब सभी की नजर प्रशासन और कंपनी की आधिकारिक प्रतिक्रिया तथा आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

रिपोर्ट/अमर सदाना

Lavanya Dayal

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