पूर्व IAS अधिकारी राकेश मेहता ने दिल्ली के परिवहन और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई अहम बदलावों में भूमिका निभाई थी।
नई दिल्ली:
दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता का निधन आत्महत्या के कारण हुआ है. 74 वर्षीय मेहता अपने नोएडा स्थित घर में मृत मिले. वह 1975 बैच के IAS अधिकारी थे और दिल्ली प्रशासन में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके थे.
पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है. इसमें बीमारी से परेशान होने की बात कही गई है. नोट में किसी व्यक्ति को इस कदम के लिए जिम्मेदार नहीं बताया गया है.
पुलिस के मुताबिक, राकेश मेहता ने नोएडा स्थित अपने घर में फांसी लगाकर जान दी. जांच के दौरान अंग्रेजी में लिखा एक पन्ने का नोट बरामद हुआ.
नोट में उन्होंने अपनी बीमारी और उससे होने वाली परेशानी का जिक्र किया है. पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है.
राकेश मेहता मूल रूप से देहरादून के रहने वाले थे. उनकी पत्नी सुमंती मेहता भी दिल्ली कैडर की सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं. घटना के समय वह देहरादून में अपने बेटे के पास थीं. उनकी बेटी लंदन में रहती हैं.
राकेश मेहता ने दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं. वर्ष 2007 में उन्हें दिल्ली का मुख्य सचिव बनाया गया.
वह नवंबर 2010 तक इस पद पर रहे. इस दौरान दिल्ली में कई बड़े प्रशासनिक और विकास से जुड़े काम हुए. इससे पहले भी वह परिवहन, बिजली और नगर निगम से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके थे.
राकेश मेहता का दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल से भी गहरा जुड़ाव रहा. उन्होंने लंबे समय तक उनकी सरकार के साथ काम किया.
उनके कार्यकाल में दिल्ली के परिवहन और शहरी ढांचे में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए. प्रशासनिक स्तर पर लिए गए इन फैसलों का असर शहर की रोजमर्रा की सुविधाओं पर भी दिखाई दिया.
राकेश मेहता को दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन में सुधार से जुड़े कई फैसलों के लिए याद किया जाता है. परिवहन विभाग के प्रधान सचिव रहते उन्होंने बस व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया.
उनके कार्यकाल में लो-फ्लोर बसों को दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन का हिस्सा बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी. करीब 2,500 लो-फ्लोर बसें बेड़े में शामिल की गईं.
दिल्ली में ब्लूलाइन बसों से जुड़े हादसे लंबे समय तक बड़ा मुद्दा रहे थे. राकेश मेहता उस समिति में भी शामिल थे, जिसने ब्लूलाइन बसों से जुड़े संकट की जांच की थी.
बाद में इन बसों को हटाने और उनकी जगह लो-फ्लोर बसें लाने की योजना पर काम हुआ. दिल्ली की बस व्यवस्था में बदलाव को इसी प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जाता है.
राकेश मेहता ने दिल्ली के बिजली विभाग में सचिव के तौर पर भी काम किया. इसी दौरान दिल्ली में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी.
इसके अलावा दिल्ली नगर निगम में प्रॉपर्टी टैक्स की गणना के लिए यूनिट एरिया मेथड लागू करने में भी उनकी भूमिका बताई जाती है.
दिल्ली में 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन की तैयारियों में भी राकेश मेहता ने अहम जिम्मेदारी निभाई थी. प्रशासनिक स्तर पर उनकी भूमिका आयोजन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कामों में रही.
पूर्व मंत्री अरविंदर सिंह लवली और उनके पुराने सहयोगियों ने भी मेहता के प्रशासनिक कामकाज को याद किया. उन्हें ऐसे अधिकारी के तौर पर बताया गया जो दिल्ली के विकास से जुड़े फैसलों को लागू करने में सक्रिय रहते थे.
राकेश मेहता ने अपने प्रशासनिक करियर का बड़ा हिस्सा दिल्ली में बिताया. परिवहन, बिजली, नगर निगम और शहरी विकास से जुड़े कई विभागों में उन्होंने जिम्मेदारियां संभालीं.
मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी दिल्ली के प्रशासनिक इतिहास में उनका नाम उन अधिकारियों में लिया जाता रहा, जिन्होंने शहर के बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं में बदलाव लाने में भूमिका निभाई
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