16 साल पहले इच्छामृत्यु पर बन चुकी है फिल्म
Sanjay Leela Bhansali Movie: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 11 मार्च 2026 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने गाजियाबाद के 13 साल से अचेत पड़े युवक हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया (इच्छामृत्यु) की अनुमति दे दी। यह भारत का पहला मामला है, जिसमें 2018 के ‘कॉमन कॉज’ फैसले को कानूनी रूप से लागू किया गया। इस घटना ने पूरे देश में संवेदनाओं को झकझोर दिया।
यह मामला ऐतिहासिक होने के साथ-साथ बॉलीवुड की यादों को भी ताजा कर गया। क्योंकि 16 साल पहले इसी विषय पर संजय लीला भंसाली ने फिल्म बनाई थी ‘गुजारिश’। इस फिल्म में ऋतिक रोशन ने अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा। कहा जाता है कि भंसाली को इस फिल्म की प्रेरणा क्रिस्टोफर नोलन की मशहूर फिल्म “द प्रेस्टीज” से मिली थी।
शुरुआत में सलमान खान खुद इस फिल्म में ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ काम करना चाहते थे, लेकिन भंसाली ने ऋतिक रोशन को हीरो के रूप में चुना। इस फैसले से सलमान नाराज हो गए, और उनका गुस्सा सार्वजनिक रूप से सामने आया।
एक पब्लिक इवेंट में जब सलमान से ‘गुजारिश’ के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “अरे, उसमें तो मक्खी उड़ रही थी, लेकिन मच्छर भी नहीं गया देखने। कोई कुत्ता भी नहीं गया” इसी दौरान एक लड़की ने उनसे पूछा कि बॉलीवुड में बड़ा कैसे बने, तो सलमान ने भंसाली की तरफ इशारा करते हुए कहा, “जाकर उनसे मिलो। वो तुम्हारे ऊपर फिल्म बनाएगा, खुद खूब कमाएगा, लेकिन तुम्हें कुछ नहीं देगा।”
सलमान का यह बयान ऋतिक रोशन को बहुत दुख पहुंचाने वाला था। ऋतिक हमेशा सलमान को अपना मेंटॉर मानते थे। उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा “मैंने सलमान भाई को हमेशा अच्छा इंसान माना है, मैं आज भी उन्हें बहुत मानता हूं। लेकिन किसी फिल्ममेकर का मजाक उड़ाना, सिर्फ इसलिए कि उसकी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली, ये सही नहीं है। हीरो को कभी घमंड नहीं करना चाहिए। जब आप बहुत सफल हों तो और भी ज्यादा उदार और प्यार करने वाले बनना चाहिए। मुझे बहुत दुख हुआ जब भंसाली सर के बारे में ऐसा बोला गया।”
‘गुजारिश’ न केवल भारतीय सिनेमा में संवेदनशील विषय इच्छामृत्यु को उठाने वाली पहली फिल्मों में शामिल है, बल्कि इसमें भंसाली की खूबसूरत निर्देशन शैली और ऋतिक की मासूमियत भरी अदाकारी ने इसे अविस्मरणीय बना दिया। यह फिल्म दर्शकों को भावनाओं से जोड़ती है और मानव जीवन की संवेदनाओं को उजागर करती है।
सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला और ‘गुजारिश’ की यादें हमें यह याद दिलाती हैं कि कभी-कभी वास्तविक जीवन की घटनाएं और सिनेमा के माध्यम से उठाए गए सामाजिक मुद्दे आपस में जुड़ जाते हैं, और हर घटना के पीछे इंसानी संवेदनाएं छुपी होती हैं।
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