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Saudi Oil Pipeline Attack: सऊदी की अहम तेल पाइपलाइन बंद, 100 डॉलर पार क्रूड से भारत पर कितना असर?

कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। इसी बीच सऊदी अरब ने अपनी अहम East-West Oil Pipeline को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इस पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने इसे एहतियाती कदम के तौर पर बंद करने की जानकारी दी।

यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को पश्चिमी तट के यनबू बंदरगाह से जोड़ती है। इसकी लंबाई करीब 1,200 किलोमीटर है। सबसे खास बात यह है कि इससे सऊदी अरब को Strait of Hormuz को बायपास करके तेल निर्यात करने में मदद मिलती है।

ड्रोन हमले के बाद क्यों बंद हुई पाइपलाइन?

सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, 10 सितंबर की सुबह रियाद और मदीना क्षेत्रों में East-West Pipeline को कई हमलों का निशाना बनाया गया। इस दौरान कुछ लोग घायल हुए और पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा।

हमले के बाद विशेषज्ञ तकनीकी टीमों ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था संभाली और नुकसान का आकलन शुरू किया। सऊदी अरब ने फिलहाल पाइपलाइन को एहतियात के तौर पर बंद रखा है। इसे दोबारा कब शुरू किया जाएगा, इसकी समयसीमा अभी नहीं बताई गई है।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने बाद में कहा कि पाइपलाइन पर हमला इराक से लॉन्च किए गए ड्रोन से हुआ था। हालांकि, सऊदी ने फिलहाल सैन्य जवाब नहीं देने का फैसला किया है।

1,200 किलोमीटर लंबी है East-West Pipeline

East-West Pipeline को Saudi Petroline भी कहा जाता है। यह करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है और सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से से कच्चे तेल को लाल सागर के किनारे स्थित यनबू तक पहुंचाती है।

इसकी कुल क्षमता करीब 70 लाख बैरल प्रतिदिन तक बताई जाती है। हाल के महीनों में इस मार्ग से करीब 40 से 50 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा जा रहा था।

इस पाइपलाइन की अहमियत इसलिए और बढ़ गई है क्योंकि Strait of Hormuz में युद्ध के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।

होर्मुज के बाद यह रास्ता भी मुश्किल में

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल है। यहां से टैंकरों की आवाजाही कम होने के बाद सऊदी अरब ने अपने पश्चिमी तट वाले निर्यात मार्ग का इस्तेमाल बढ़ाया था।

East-West Pipeline के जरिए पूर्वी तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल सीधे यनबू पहुंचाया जा सकता है। वहां से टैंकर लाल सागर के रास्ते एशिया और दूसरे बाजारों तक तेल ले जा सकते हैं।

अब इसी वैकल्पिक रास्ते पर हमला होने से वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ गई है।

क्रूड 100 डॉलर के पार, अब और महंगा हो सकता है तेल?

पाइपलाइन बंद होने की खबर ऐसे समय आई है जब कच्चे तेल की कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं। शुक्रवार को Brent crude करीब 104.56 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। सप्ताह के दौरान इसकी कीमत में 8 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई।

अगर पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है, तो बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसका असर क्रूड की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, सिर्फ पाइपलाइन बंद होने से यह तय नहीं है कि क्रूड की कीमत कितनी बढ़ेगी। आगे का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि पाइपलाइन कितने समय तक बंद रहती है और सऊदी अरब दूसरे निर्यात मार्गों से कितनी सप्लाई बनाए रख पाता है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। सऊदी अरब भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।

अगर यनबू से होने वाला निर्यात लंबे समय तक प्रभावित होता है, तो एशियाई खरीदारों के लिए वैकल्पिक स्रोतों और मार्गों पर निर्भरता बढ़ सकती है।

इसका असर केवल कच्चे तेल की कीमत तक सीमित नहीं रहेगा। शिपिंग, बीमा और परिवहन लागत बढ़ने की स्थिति में भारत के लिए तेल आयात और महंगा हो सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमत पर तुरंत असर होगा?

क्रूड की कीमत बढ़ने का असर भारत में पेट्रोल और डीजल की लागत पर पड़ सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय क्रूड महंगा होने का मतलब यह नहीं है कि अगले ही दिन घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमत उसी अनुपात में बढ़ जाएगी।

भारतीय ईंधन कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के अलावा डॉलर-रुपया विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, टैक्स और तेल कंपनियों की कीमत नीति जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।

इसलिए फिलहाल सबसे बड़ा जोखिम महंगे क्रूड और आयात लागत बढ़ने का है।

आगे क्या होगा?

सऊदी अरब अभी पाइपलाइन को हुए नुकसान का आकलन कर रहा है। इसकी दोबारा शुरुआत कब होगी, यह स्थिति साफ होने के बाद ही पता चलेगा।

दूसरी ओर, लाल सागर और Bab el-Mandeb क्षेत्र में भी तनाव बढ़ा हुआ है। ऐसे में दुनिया के सामने एक साथ कई महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में व्यवधान का खतरा है।

अगर ये बाधाएं लंबे समय तक जारी रहती हैं, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए आने वाले दिनों में क्रूड की कीमत और सप्लाई दोनों पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।

Ayush Chaudhary

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