भारत को न्यूक्लियर क्षेत्र में बनाया फास्ट ब्रिडर देश
Prototype Fast Breeder Reactor India: तमिलनाडु के कलपक्कम में भारत के न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। कलपक्कम में स्थापित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने क्रिटिकलिटी हासिल कर ली है, यानी यह रिएक्टर अब स्वत: न्यूक्लियर चेन रिएक्शन शुरू कर चुका है। रूस के बाद अब भारत वह दूसरा देश बन गया है, जहां फास्ट ब्रीडर टेक्नोलॉजी ऑटोमोड में काम कर रही है।
यह उपलब्धि होमी जहांगीर भाभा के सात दशक पुराने सपने को साकार करती है और भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम देती है। साथ ही यह देश के 2070 के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने की राह में भी अहम भूमिका निभाएगी।
कलपक्कम में 500 मेगावाट क्षमता वाला यह रिएक्टर भाविनी (भाभा न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्प्लेक्स) द्वारा विकसित किया गया है। यह प्लूटोनियम-यूरेनियम मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल करता है और तरल सोडियम को कूलेंट के रूप में उपयोग करता है।
विशेष बात यह है कि सामान्य न्यूक्लियर रिएक्टर केवल ईंधन जलाते हैं, जबकि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर जितना ईंधन खर्च करता है उससे ज्यादा नया फिसाइल मटेरियल तैयार करता है, जो भविष्य में ऊर्जा उत्पादन के लिए इस्तेमाल हो सकता है। क्रिटिकलिटी हासिल होने का मतलब है कि रिएक्टर अब स्वयं-ब-स्वयं ऊर्जा उत्पन्न कर रहा है और भविष्य के लिए ईंधन भी स्टोर कर रहा है।
भारत ने 1950 के दशक में डॉ. होमी भाभा के नेतृत्व में तीन स्टेज न्यूक्लियर प्रोग्राम की शुरुआत की थी:
भारत के पास यूरेनियम सीमित है, लेकिन थोरियम के भंडार दुनिया में सबसे बड़े हैं। PFBR की सफलता दूसरे स्टेज को मजबूत करती है और भविष्य में थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन को आसान बनाती है।
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकरीबन 550 डिग्री तक गर्म तरल सोडियम के साथ काम करता है। किसी भी छोटी चूक से पूरा सिस्टम प्रभावित हो सकता है। 2004 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में कई तकनीकी चुनौतियां और बजट बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इसे पूरी किया। पूर्व परमाणु ऊर्जा आयोग अध्यक्ष डॉ. अनिल काकोदकर ने इसे ऐतिहासिक बताया और कहा कि यह उपलब्धि भारत को फास्ट ब्रिडर टेक्नोलॉजी में विश्व स्तर पर मजबूत स्थिति में लाती है।
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर न केवल कम कचरा पैदा करता है बल्कि मौजूदा यूरेनियम और प्लूटोनियम का बेहतर उपयोग करता है। इससे बिजली की लागत कम होगी और भारत ऊर्जा सुरक्षा में मजबूत बनेगा। कलपक्कम PFBR की सफलता सिर्फ एक रिएक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के ऊर्जा क्षेत्र और आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए मिसाल बनेगी। भविष्य में ऐसे और भी रिएक्टर थोरियम का इस्तेमाल करके सस्ती और स्थायी ऊर्जा उत्पादन कर सकेंगे।
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