Shashi vision Prakash policy New momentum for good governance in Uttar Pradesh administration
Opinion : उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक परिदृश्य में मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल के रूप में एक नई संयमित सजगता का आगमन हुआ है। यह नियुक्ति मात्र वरिष्ठता की स्वीकृति नहीं, बल्कि सुशासन के सूत्रों को संयोजन से संचालन और दृष्टिकोण से निष्पादन तक पहुंचाने की एक जिम्मेदारीपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली तेजस्विता, तीव्रता, तथ्यता और तत्परता के चतुर्भुज पर आधारित है। एक ऐसी शासन-धारा, जो केवल योजनाओं की घोषणा पर नहीं, धरातल पर दिखने वाले परिणामों पर विश्वास करती है। इसी शासन-शैली को अब गोयल को गति और गहराई देनी है।
शशि प्रकाश गोयल, 1989 बैच के वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। उनकी गिनती तकनीक पसंद अफसरों में होती है। गोयल ने अपने तीन दशकों से अधिक के प्रशासनिक जीवन में राजस्व, नगर विकास, गृह, पथ निर्माण, औद्योगिक विकास जैसे विभागों में निर्णायक भूमिका निभाई है। वे मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव के रूप में शासन के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु पर क्रियाशील रहे हैं, जहां निर्णय केवल लिए नहीं जाते, उन्हें मूल्यांकन, मार्गदर्शन और मॉनिटरिंग के संतुलन से आगे बढ़ाया जाता है। उनकी प्रशासनिक शैली में संयम, संकल्प और संरचना का त्रिवेणी संगम देखा गया है।
गोयल की कार्यशैली में मौन में मिशन, संकल्प में समर्पण और फाइल में फलितार्थ की वह शैली है, जो उत्तर प्रदेश जैसे विराट प्रदेश की जटिलता को संयमित संकल्पना और संरचित संप्रेषण से साध सकती है। उनकी दक्षता नीति के पृष्ठों से आगे जाकर जनता के पलकों तक पहुंची है। यही कारण है कि वे मुख्यमंत्री के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में सम्मिलित रहे हैं।
गोयल, मनोज कुमार सिंह का स्थान ले रहे हैं, जिन्होंने दुर्गाशंकर मिश्रा के पश्चात यह पद ग्रहण किया था। मनोज सिंह ने अपने सीमित कार्यकाल में ग्राम्य विकास की गहराई और फील्ड की तत्परता को शासन में समाहित किया। अब शासन की अपेक्षा एक ऐसे नेतृत्व की है, जो गति में गरिमा, दृष्टि में दीर्घता और निष्पादन में नयापन ला सके।
वर्तमान समय में मुख्य सचिव के समक्ष जो कार्य-सूची है, वह केवल योजनाओं की निगरानी नहीं, जनजीवन में योजनाओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने की चुनौती है। GBC-5 के तहत ₹5.06 लाख करोड़ की 5600 से अधिक परियोजनाएं, नकलमुक्त परीक्षाएं, भर्तियों में पारदर्शिता, खनन और भू-माफियाओं पर नियंत्रण, शहरी संयोजन से लेकर ग्राम्य सशक्तिकरण तक सभी मोर्चों पर परिणाम दिखाना अब केवल विभागों की जिम्मेदारी नहीं, मुख्य सचिव की न्याययुक्त निगरानी और निष्पादन-शक्ति की परीक्षा है।
इसके साथ ही जेवर एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसी बहुप्रतीक्षित परियोजनाएं इस साल पूरी होनी हैं, वहीं पंचायत चुनावों की तैयारियां भी शासन को सहज और सशक्त नेतृत्व की ओर देख रही हैं। इन सभी लक्ष्यों की डोर अब एसपी गोयल के हाथों में है।
गोयल का पिछला कार्यकाल इस परीक्षा के लिए तैयारी की तरह रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय में रहते हुए उन्होंने सीएम डैशबोर्ड, GBC संचालन, डिजिटल निगरानी प्रणाली, और जनपदीय रिपोर्टिंग तंत्र को सुदृढ़ बनाया। उनके नेतृत्व में विकास को वाक्य नहीं, व्यावहारिकता की भाषा मिली। अब यही अनुभव पूरे शासनतंत्र को गति और गंभीरता देने में सहायक हो सकता है।
अब यह कुर्सी केवल कागजों की कलमकारी नहीं, बल्कि परिणामों की पारदर्शिता का प्रतीक बन चुकी है। मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल के समक्ष उत्तर प्रदेश को परियोजनाओं की परिकल्पना से निकालकर जनजीवन की जागरूकता तक पहुंचाने की चुनौती है। यह कार्य केवल नियमों की निगरानी नहीं, बल्कि न्यायसंगत निष्पादन की पुनःस्थापना है।
संक्षेप में कहें तो, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को धरातल पर उतारना ही मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल की सफलता की वास्तविक कसौटी होगी। जहां केवल योजनाओं की गति नहीं, बल्कि उनका जनजीवन पर पड़ने वाला प्रभाव ही उनके प्रशासनिक नेतृत्व की प्रामाणिकता सिद्ध करेगा।
और इसमें किंचित भी संशय नहीं कि शशि प्रकाश की कार्यशैली में, उनके नाम के अनुरूप ही, चंद्रमा की शीतल दृष्टि और प्रकाश की प्रखर दिशा का संतुलित समागम है- न शोर, न प्रदर्शन केवल शांति में साधना और प्रक्रिया में परिणाम।
यही सौम्यता और संकल्पशीलता उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपेक्षाओं के अनुरूप स्थिरता, संरचना और सिद्धि के संगम तक ले जाने में समर्थ बनाती है।
यह कहना समीचीन होगा कि मुख्य सचिव के रूप में उनका कार्यकाल नीतियों के अनुपालन से आगे बढ़कर, जनजीवन में सुशासन की सजीव अनुभूति का आधार बनेगा- एक ऐसा उजास, जो ‘शशि’ की तरह सहज हो और ‘प्रकाश’ की तरह स्पष्ट।
-प्रणय विक्रम सिंह
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