Sonam Wangchuk Health: जलवायु कार्यकर्ता और लद्दाख के सामाजिक सुधारक सोनम वांगचुक की लगातार जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया है। बुधवार को हुई सुनवाई में अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए गुरुवार तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि मामला व्यक्ति के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा है, इसलिए इसे तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि वे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं और अन्य सार्वजनिक मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। लंबे समय से भोजन नहीं लेने के कारण उनकी सेहत को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। इसी बीच दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई, जिसमें वांगचुक के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें आवश्यक चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई।
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि इसमें किसी व्यक्ति के जीवन और स्वास्थ्य का प्रश्न जुड़ा हुआ है। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से पूछा कि वांगचुक की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने दोनों सरकारों को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई तक विस्तृत जवाब प्रस्तुत करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की तात्कालिकता को देखते हुए इसमें अनावश्यक देरी नहीं की जाएगी।
भूख हड़ताल के लगातार जारी रहने से सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। जनहित याचिका में दावा किया गया है कि लंबे समय तक भोजन न लेने से उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि वांगचुक को समय-समय पर चिकित्सकीय जांच और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए।
सोनम वांगचुक के समर्थन में कई सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के लोग भी जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर लगातार गतिविधियां बनी हुई हैं और समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं।
अब इस मामले में सभी की निगाहें दिल्ली हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। केंद्र और दिल्ली सरकार को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद कोर्ट यह तय कर सकता है कि वांगचुक के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर आगे क्या निर्देश दिए जाएं।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल अब केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं रह गई है, बल्कि यह स्वास्थ्य और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कानूनी विषय बन चुकी है। दिल्ली हाई कोर्ट की सक्रियता से स्पष्ट है कि अदालत इस मामले को गंभीरता से देख रही है। अब सरकारों के जवाब और अगली सुनवाई पर इस पूरे मामले की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।
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