Chemmani Mass Grave: श्रीलंका के जाफना के पास चेम्मानी इलाके में सामूहिक कब्र की खुदाई के दौरान मिले मानव अवशेषों की संख्या 582 तक पहुंच गई है। इनमें शिशुओं और बच्चों के अवशेष भी शामिल बताए जा रहे हैं। खुदाई के दौरान मानव कंकालों के अलावा खिलौने, दूध की बोतलें, स्कूल बैग, जूते और चूड़ियां जैसी चीजें भी मिली हैं। यह स्थल लंबे समय से श्रीलंका के गृहयुद्ध के दौरान लापता हुए लोगों से जुड़ी आशंकाओं के कारण जांच के केंद्र में रहा है।
चेम्मानी-सिंथुपथी क्षेत्र में खुदाई दोबारा तब शुरू हुई, जब वर्ष 2025 में निर्माण कार्य के दौरान जमीन से मानव अवशेष मिलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद अदालत की निगरानी में खुदाई शुरू की गई। पहले चरण में 19 कंकाल मिले थे, जबकि दूसरे चरण के अंत तक कुल 240 मानव अवशेषों की पहचान की गई थी। इसके बाद तीसरे चरण की खुदाई में लगातार नए कंकाल मिलते गए। अगस्त 2026 में खुदाई के दौरान यह संख्या लगातार बढ़ी और अब 582 मानव अवशेषों की पहचान की जा चुकी है। हालांकि, अभी तक इन सभी अवशेषों की पहचान और उनकी मौत की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस खुदाई की सबसे चिंताजनक बात यह है कि यहां बच्चों और शिशुओं के अवशेष भी मिले हैं। खुदाई के दौरान दूध पिलाने की बोतल, खिलौने, स्कूल बैग, बच्चों के जूते और चूड़ियां जैसी वस्तुएं बरामद हुई हैं। इससे इस स्थल पर दफन लोगों की उम्र और पहचान को लेकर जांचकर्ताओं के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हुए हैं। कुछ अवशेषों पर चोट के निशान होने की जानकारी भी सामने आई है, लेकिन इनकी मौत का कारण और परिस्थितियां फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।
चेम्मानी में सामूहिक कब्र होने का मामला पहली बार 1990 के दशक के आखिर में सामने आया था। वर्ष 1998 में एक श्रीलंकाई सैनिक पर एक स्कूली छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या का मुकदमा चल रहा था। इसी दौरान सैनिक ने दावा किया था कि सेना की हिरासत में रखे गए सैकड़ों तमिलों को मारकर चेम्मानी इलाके में दफनाया गया था। इसके बाद 1999 में यहां खुदाई कराई गई और 15 कंकाल बरामद हुए थे। सरकारी जांच में कुछ कंकालों पर गंभीर चोट के निशान मिलने की बात सामने आई थी। हालांकि, जांच बाद में आगे नहीं बढ़ सकी और मामला लंबे समय तक अधर में रहा।
श्रीलंका में गृहयुद्ध वर्ष 1983 में सरकार और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के बीच शुरू हुआ था। LTTE अलग तमिल राज्य की मांग कर रहा था। करीब 26 वर्षों तक चले इस संघर्ष का अंत 2009 में हुआ, जब श्रीलंकाई सेना ने LTTE को हरा दिया। इस युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में लोग मारे गए और कई लोग लापता हो गए। तमिल नागरिकों के खिलाफ सुरक्षा बलों पर हत्या, अपहरण और अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगते रहे हैं। वहीं LTTE पर भी हत्या, अपहरण और अन्य हिंसक घटनाओं के आरोप लगे हैं।
चेम्मानी में लगातार हो रही खुदाई ने श्रीलंका के गृहयुद्ध के दौरान लापता हुए लोगों की जांच और उनकी पहचान को लेकर सवाल फिर से सामने ला दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों और लापता लोगों के परिवार लंबे समय से इस मामले में पारदर्शी जांच और जवाबदेही की मांग करते रहे हैं। फिलहाल खुदाई और फॉरेंसिक जांच जारी है। इन अवशेषों की पहचान कौन हैं और उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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