sugar price hike India: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। देश के कई बड़े शहरों में पिछले करीब दो हफ्तों के दौरान चीनी के दाम में 40 फीसदी तक की तेजी देखी गई है। कीमतों में इस उछाल की बड़ी वजह घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता कम होना बताई जा रही है। बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने स्टॉक और बिक्री को लेकर भी सख्ती बढ़ा दी है।
शुरुआत में उत्पादन बढ़ने की थी उम्मीद
2025-26 के चीनी सीजन की शुरुआत में सरकार और उद्योग को उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद थी। शुरुआती अनुमान करीब 34.9 मिलियन टन उत्पादन का था। पर्याप्त उपलब्धता की उम्मीद में सरकार ने चीनी के निर्यात को भी मंजूरी दी थी। लेकिन सीजन आगे बढ़ने के साथ उत्पादन के अनुमान में कमी आती गई। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में कम पैदावार, बारिश से फसल को नुकसान और कुछ फसल रोगों ने उत्पादन पर असर डाला। अब सरकार का अनुमान करीब 30.6 मिलियन टन उत्पादन का है।
त्योहारों की बढ़ी मांग ने बढ़ाया दबाव
उत्पादन घटने के साथ ही त्योहारी सीजन में चीनी की मांग बढ़ गई। अगस्त में सरकार ने बिक्री कोटा बढ़ाने के बजाय इसे पिछले साल के स्तर यानी 2.25 मिलियन टन पर ही रखा। इससे बाजार में उपलब्धता को लेकर दबाव और बढ़ गया। सरकार ने स्थिति को देखते हुए 19 अगस्त को बड़े औद्योगिक खरीदारों के लिए स्टॉक सीमा और कड़ी कर दी। इसके बाद करीब एक दशक में पहली बार चीनी के आयात का रास्ता भी खोला गया।
सरकार ने 10 लाख टन आयात को दी मंजूरी
सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति दी। इसके बावजूद कुछ मिलों में चीनी का भाव करीब 7,100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। सरकार के मुताबिक, कीमतों में तेजी की वजह केवल एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का इस्तेमाल नहीं है। कम उत्पादन, फसल को मौसम से हुआ नुकसान, त्योहारी मांग और बाजार की गतिविधियां इसके पीछे प्रमुख कारण हैं।
कीमतों पर सरकार की नजर
त्योहारी सीजन में मांग और बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार घरेलू उपलब्धता और चीनी की कीमतों पर लगातार नजर रख रही है। आयात की अनुमति और स्टॉक पर नियंत्रण जैसे कदमों का उद्देश्य बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और बढ़ती कीमतों का असर उपभोक्ताओं पर कम करना है। फिलहाल चीनी की कीमतों में तेजी ने त्योहारों से पहले घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में घरेलू उत्पादन, आयात और बाजार में उपलब्धता यह तय करेगी कि कीमतों में राहत कब तक मिलती है।
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