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Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को टीचिंग सर्विस से जुड़े बड़े निर्देश दिए है। टीचिंग सर्विस में सभी शिक्षकों को अपनी सर्विस में बने रहने या प्रमोशन पाने के लिए एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी TET पास करना जरुरी होगा। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉज मसीह की बेंच ने कहा-
जिन टीचर्स की नौकरी को 5 साल हो चुके हैं, उन्हें टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) क्वालिफाई करना जरूरी होगा। अगर ऐसा नहीं किया तो उन्हें इस्तीफा देना होगा या फिर कंपल्सरी रिटायरमेंट लेना होगा।
कोर्ट ने कहा- जिन शिक्षकों की नौकरी में 5 साल से कम सेवा बची है, वे बिना TET पास किए पढ़ा सकते हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें प्रमोशन नहीं मिलेगा। जिनकी नौकरी में 5 साल से ज्यादा सेवा बाकी है, उन्हें 2 साल के अंदर TET पास करना होगा।
कोर्ट ने कहा कि कई शिक्षक पिछले 20 साल से बिना TET पास किए पढ़ा रहे हैं और उन पर कोई शिकायत नहीं है। 2014 में आए “प्रमाटी” फैसले पर कोर्ट ने सवाल उठाया है। उस फैसले में कहा गया था कि RTE कानून अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू नहीं होगा।
अब सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इस फैसले पर दोबारा विचार जरूरी है। यह मामला अब CJI को भेजा गया है, ताकि एक बड़ी बेंच (7 जजों) यह तय करे कि RTE कानून और अल्पसंख्यक संस्थानों के अधिकारों में टकराव है या नहीं। RTE की कुछ धाराएं अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए लागू होगी या नहीं।
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