Telangana: तेलंगाना में मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी और वन मंत्री कोंडा सुरेखा के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। मुख्यमंत्री ने सुरेखा को तत्काल प्रभाव से मंत्रिपरिषद से हटाने की सिफारिश राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को भेज दी है। यह कदम उनकी बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल के मुख्यमंत्री पर सार्वजनिक हमले के बाद उठाया गया। हालांकि, सुरेखा ने कहा कि वह कांग्रेस नहीं छोड़ेंगी और विधायक के तौर पर काम करती रहेंगी।
सुरेखा ने रेवंत रेड्डी पर उन्हें जबरन कैबिनेट से हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार में अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। उनका सवाल था कि जो नेता मुख्यमंत्री की आलोचना या उनके खिलाफ आपत्तिजनक बयान दे चुके हैं, वे अब भी पदों पर क्यों हैं। सुरेखा ने यह भी दावा किया कि कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता सरकार से असंतुष्ट हैं, लेकिन खुलकर बोल नहीं रहे। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने वही बातें सार्वजनिक रूप से कहीं, जिन्हें पार्टी के दूसरे लोग कहने से बच रहे थे। सुरेखा ने चेतावनी दी कि कार्यकर्ताओं और मंत्रियों की बात नहीं सुनी गई तो कांग्रेस को अगले चुनाव में राजनीतिक नुकसान हो सकता है। राहुल गांधी से दिल्ली में मिलने के सवाल पर उन्होंने इनकार किया और कहा कि उन्हें लगता है कि उन्हें वापस नहीं लिया जाएगा। उन्होंने यह भी माना कि रेवंत रेड्डी से उन्हें ठगा हुआ महसूस हुआ।
सुरेखा ने 23 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को अलग-अलग पत्र भेजे थे। इनमें उन्होंने खुद को BC महिला मंत्री बताते हुए राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से दबाए जाने का आरोप लगाया। उनका दावा था कि वन, पर्यावरण और बंदोबस्ती विभागों से जुड़े फैसले उनके परामर्श के बिना मुख्यमंत्री कार्यालय से लिए जा रहे थे, जिससे उनकी भूमिका महज "नाममात्र" की रह गई थी। उन्होंने यदाद्रि मंदिर ट्रस्ट बोर्ड के गठन की जानकारी नहीं दिए जाने, सम्मक्का-सरलम्मा मंदिर के लिए उनके विभाग से जारी धन को एक दिन में ही सड़क एवं भवन विभाग में ट्रांसफर किए जाने और श्रीराम नवमी के सरकारी विज्ञापनों में उनकी तस्वीर नहीं होने का भी मुद्दा उठाया।
सुरेखा ने अपने पूर्व OSD सुमंत को बिना जानकारी हटाए जाने का आरोप लगाया। उनका दावा था कि पुलिस उनके सरकारी आवास पर उसे गिरफ्तार करने पहुंची थी और अब उस पर दूसरा गैर-जमानती मामला दर्ज है, जिसमें पर्याप्त सबूत नहीं हैं। वारंगल ईस्ट विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए पड़ोसी क्षेत्रों की तरह धन उपलब्ध नहीं कराने का आरोप भी उन्होंने लगाया। उन्होंने वारंगल स्मार्ट सिटी मॉडल बस स्टैंड और बोंडी वागु विस्तार में देरी का जिक्र किया। उनका आरोप था कि स्टेशन घनपुर विधायक कडियम श्रीहरि ने उनके बिना बंदोबस्ती विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की, लेकिन आपत्ति के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सुरेखा ने रेवंत रेड्डी के राजनीतिक रुख में असमानता का आरोप लगाते हुए जग्गा रेड्डी की उम्मीदवारी पर उनके बयान और पार्कल में मौजूदा विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी को दोबारा जिताने की अपील की तुलना की। उनके अनुसार, यह पार्टी के भीतर अलग-अलग राजनीतिक मानदंड दिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक वयस्क बेटी के व्यक्तिगत बयानों के लिए मां को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। पत्रों के साथ कथित तौर पर वीडियो और अन्य दस्तावेजों वाली पेन ड्राइव भी भेजी गई थी। सुरेखा ने कांग्रेस नेतृत्व में अपना विश्वास कायम रहने की बात कही थी।
ताजा विवाद तब बढ़ा जब सुष्मिता पटेल ने पार्कल में रेवंत रेड्डी द्वारा रेवुरी प्रकाश रेड्डी के समर्थन पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री "कोंडा के क्षेत्र" में आकर प्रकाश रेड्डी को दोबारा जिताने की अपील क्यों कर रहे हैं। सुष्मिता खुद भी अगले चुनाव में पार्कल से चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुकी हैं। उन्होंने रेवंत रेड्डी और उनके भाइयों पर राज्य का फायदा उठाने, 200 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन और एक शेल कंपनी से जुड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनका परिवार किसी के आगे झुकना नहीं जानता। उन्होंने अपने कापू और पद्मशाली समुदाय का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री के आसपास के लोगों पर "दलाली" करने और उन्हें गलत जानकारी देने का आरोप भी लगाया। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस हाईकमान के प्रति सम्मान जताया।
सुष्मिता के बयान के बाद तेलंगाना कांग्रेस के कई विधायकों ने सुरेखा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पार्टी की अनुशासन समिति के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद मल्लू रवि ने सुरेखा से तीन दिन में जवाब मांगा। सुरेखा ने कहा कि उनकी बेटी स्वतंत्र व्यक्ति है और उसके राजनीतिक विचारों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना अनुचित है। खड़गे और तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन से मुलाकात के बाद उन्होंने अपने मंत्री के तौर पर प्रदर्शन का बचाव किया और कहा कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप नहीं हैं।
इसी बीच तेलंगाना सरकार ने कई अहम पदों पर बदलाव को मंजूरी दी है। तेलंगाना प्लानिंग बोर्ड के उपाध्यक्ष जी. चिन्ना रेड्डी की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द कर गडवाल विजयलक्ष्मी को नया उपाध्यक्ष बनाया गया है। नेरेला शारदा को तेलंगाना राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सदस्य सुधा रानी को काकतीय अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (KUDA) की नई अध्यक्ष नियुक्त करने को मंजूरी दी गई है। अब सुरेखा को कैबिनेट से हटाने की सिफारिश पर राज्यपाल की औपचारिक कार्रवाई बाकी है। इस तरह बेटी के बयान से शुरू हुआ विवाद सुरेखा की सरकार और कांग्रेस नेतृत्व से जुड़ी पुरानी शिकायतों तक पहुंच गया है।
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