US Shutdown 2025
US Shutdown 2025 : अमेरिका में एक बार फिर शटडाउन हो गया है। दरअसल, सरकार के कामकाज को 21 नवंबर तक अस्थायी रूप से फंड देने के लिए रिपब्लिकन सांसदों ने एक विधेयक संसद में पेश किया था, लेकिन वोटिंग में यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। डेमोक्रेट सांसदों ने इसका विरोध किया और बिल को रोक दिया। नतीजतन राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पहली बार सरकारी फंडिंग रुक गई और सरकार आंशिक रूप से बंद हो गई। मंगलवार शाम हुए मतदान में यह विधेयक 55-45 के अंतर से गिर गया, जबकि इसे पारित करने के लिए कम से कम 60 मतों की आवश्यकता थी।
अमेरिका में वित्तीय वर्ष 1 अक्तूबर से शुरू होता है। इस दौरान संघीय सरकार का बजट तय किया जाता है कि आने वाले साल में सरकारी धन किस पर और कितना खर्च होगा। यदि तय समय सीमा तक संसद फंडिंग बिल को मंजूरी नहीं देती है, तो सरकारी गतिविधियां रुक जाती हैं। यही स्थिति शटडाउन कहलाती है। यह अमेरिकी राजनीति में नई बात नहीं है। पिछले कई दशकों में कई बार सरकारें बजट पर सहमति न बनने के कारण बंद हो चुकी हैं।
इस बार विवाद की मुख्य वजह “ओबामा हेल्थकेयर सब्सिडी” है। डेमोक्रेट पार्टी चाहती है कि स्वास्थ्य सेवा सब्सिडी को बढ़ाया जाए, जबकि रिपब्लिकन सांसद इस पर अतिरिक्त खर्च करने के पक्ष में नहीं हैं। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन संघीय खर्चो में कटौती की नीति अपना रहा है। यही कारण है कि दोनों दलों के बीच समझौता नहीं हो पाया और शटडाउन की स्थिति पैदा हो गई।
शटडाउन का सीधा मतलब है कि सरकार के पास गैर-जरूरी कामों के लिए पैसा नहीं बचेगा। इससे संघीय कर्मचारियों की सैलरी, शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम, छात्रवृत्ति और राष्ट्रीय उद्यान जैसी सेवाएं प्रभावित होंगी। हालांकि आपातकालीन सेवाएं जैसे सीमा सुरक्षा, स्वास्थ्य और हवाई यातायात जारी रहेंगी।
पिछले 50 वर्षो में अमेरिका में करीब 20 बार शटडाउन हो चुका है। 2019 में सबसे लंबा शटडाउन 35 दिन तक चला था। इस बार भी लगभग 7.5 लाख सरकारी कर्मचारियों पर असर पड़ेगा, जिन्हें बिना वेतन काम करना पड़ सकता है।
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आर्थिक मोर्चे पर भी शटडाउन का नकारात्मक असर देखने को मिलेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि हर हफ्ते अमेरिकी (US Shutdown 2025) विकास दर में 0.1 से 0.2 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। इसके चलते अमेरिकी बाजार और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दबाव बढ़ेगा।
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