उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और बांदा जिलों से जुड़ा यह मामला एक लंबे समय तक चलाए गए संगठित बाल यौन शोषण रैकेट से संबंधित है। आरोपी राम भवन सामान्य जीवन की आड़ में किराए के कमरे से अपराध को अंजाम देता रहा। जांच में सामने आया कि उसकी पत्नी दुर्गावती भी इस नेटवर्क में शामिल थी। बता दें कि राम भवन राज्य सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत था,
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी नाबालिग लड़कों को ऑनलाइन गेम, नकद राशि, मोबाइल फोन, चॉकलेट और अन्य उपहारों का लालच देकर अपने संपर्क में लाता था। पहले विश्वास कायम किया जाता, फिर शोषण कर उसकी रिकॉर्डिंग की जाती। बाद में इन्हीं वीडियो और तस्वीरों के जरिए बच्चों को धमकाकर चुप रहने के लिए मजबूर किया जाता था। कई पीड़ित बांदा और चित्रकूट के आसपास के क्षेत्रों से थे।
मामले की जांच 2020 के अंत में सीबीआई को सौंपी गई। जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई। एजेंसी को पता चला कि सामग्री को इंटरनेट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डार्क वेब के माध्यम से साझा और बेचा जा रहा था। डिजिटल ट्रैकिंग के दौरान अंतरराष्ट्रीय सुराग मिलने पर इंटरपोल ने भी तकनीकी सहायता दी। विदेशी एजेंसियों के साथ समन्वय कर कथित खरीदारों और प्राप्तकर्ताओं की पहचान की गई।
पॉक्सो अदालत के सरकारी वकील कमल सिंह के अनुसार, इस मामले की शुरुआती जानकारी इंटरपोल के माध्यम से सीबीआई तक पहुंची। जांच में सामने आया कि तीन मोबाइल नंबरों का उपयोग कर नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के वीडियो बनाए गए और उन्हें इंटरनेट पर अपलोड किया गया। यह आपत्तिजनक सामग्री कथित रूप से 40 से अधिक देशों में बेची गई। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान सीबीआई को एक पेन ड्राइव सौंपी गई, जिसमें सैकड़ों आपत्तिजनक तस्वीरें और कई नाबालिगों के शोषण से जुड़े वीडियो सुरक्षित थे। डिजिटल साक्ष्यों ने मामले को मजबूत आधार प्रदान किया और आरोपियों के खिलाफ ठोस प्रमाण उपलब्ध कराए।
कमल सिंह ने आगे जानकारी दी कि सीबीआई ने 30 अक्टूबर 2020 को औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी डिप्टी एसपी अमित कुमार को सौंपी गई, जिन्होंने साक्ष्यों का संकलन और तकनीकी विश्लेषण शुरू किया। विस्तृत जांच के उपरांत फरवरी 2021 में आरोपपत्र अदालत में प्रस्तुत किया गया।
यह मामला लगभग चार वर्षों तक अदालत में विचाराधीन रहा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 74 गवाहों को अदालत के समक्ष पेश किया, जिनमें जांच अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल थे। गवाहों के बयान और डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर अभियोजन ने आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया।
अधिवक्ता के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच और प्रत्यक्ष गवाहियों ने इस मामले को निर्णायक दिशा दी। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी और विस्तृत सुनवाई के बाद फैसला सुनाया गया।
इस मामले में जांच के दौरान 16 नवंबर को आरोपी राम भवन को सीबीआई ने गिरफ्तार किया। इसके बाद 28 दिसंबर 2020 को गवाहों को धमकाने के आरोप में राम भवन की पत्नी दुर्गावती को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। दोनों आरोपी तब से बांदा जेल में बंद थे। हालांकि, कुछ समय पहले दुर्गावती को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।
बांदा की विशेष अदालत ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने इसे दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में मानते हुए दोनों को मृत्युदंड सुनाया। अदालत ने सरकार को आदेश दिया गया है कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. आरोपियों के घर से बरामद नकद पैसे को भी सभी पीड़ितों में बराबर बांटने का निर्देश दिया गया है.
यह प्रकरण कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए डिजिटल अपराधों से निपटने की चुनौती को सामने लाता है। साथ ही यह संदेश देता है कि बाल शोषण से जुड़े अपराधों में कठोर कानूनी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग कितने महत्वपूर्ण हैं।
Balen Shah India thanks UN General Assembly: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संयुक्त राष्ट्र…
UPITS 2026: ग्रेटर नोएडा का इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट शुक्रवार से पांच दिनों के…
IIT Bombay Student Death: IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय BTech छात्र के माता-पिता ने मुंबई…
Rahul Gandhi Vote Chori Allegation: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य…
AI E-Waste: दुनिया में AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग मशीनों…
Meerut: मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण से प्रभावित करीब 650 व्यापारियों को…