मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर बहस के लिए डाली याचिका
Bengal elections 2026: पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालकर एसआईआर के मुद्दे पर बतौर वकील बहस करने की अनुमति मांगी है। अगर सुप्रीम कोर्ट यह अनुमति दे देता है तो सीएम ममता अपनी याचिका पर बहस करने वाली देश की पहली मौजूदा मुख्यमंत्री होंगी। बता दें कि राज्य में अप्रैल-मई में चुनाव होने हैं और चुनाव आयोग की तरफ से पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया कराई जा रही है। इस दौरान अबतक सिर्फ पश्चिम बंगाल में 65 लाख वोटरों के नाम काटे जा चुके हैं। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सीएम ममता का मानना है कि इसके जरिए राज्य में वैध मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटे जा रहे हैं और उन्हें परेशान किया जा रहा है। आइये जानते हैं एसआईआर के मुद्दे सीएम ममता बहस कर पाएंगी क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सरल और मतदाता हितैषी होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी साफ कहा कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं कटना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस पाने वाले मतदाताओं को मदद देने, स्थानीय स्तर पर सुनवाई करने और दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया आसान बनाने के निर्देश दिए थे। साथ ही राज्य प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।
सीएम ममता ने हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी। ममता ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के अहंकार और टीएमसी के प्रतिनिधिमंडल के अपमान के कारण उन्होंने चुनाव आयोग के साथ बैठक का बहिष्कार किया और बीच में ही बैठक छोड़कर चली गईं। ममता ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त शुरू से ही हमारे साथ दुर्व्यवहार किया। मैंने मुख्य चुनाव आयुक्त से कहा कि अंततः उनका हाल भी पूर्व भारतीय उपराष्ट्रपति और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ जैसा होगा।
ममता बनर्जी ने कानून की पढ़ाई की है और उनके पास LLB की डिग्री है। लेकिन सिर्फ LLB होना अदालत में वकील की तरह बहस करने के लिए काफी नहीं होता। भारत में अदालत में केस लड़ने और जज के सामने दलील देने का अधिकार Advocates Act, 1961 और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों से तय होता है।
कानून के अनुसार, कोई भी व्यक्ति तभी वकील माना जाता है जब वह राज्य बार काउंसिल में पंजीकृत हो, ऑल इंडिया बार एग्जाम (AIBE) पास किया हो और उसके पास Certificate of Practice हो। ममता बनर्जी ने इनमें से कोई भी औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं की है, इसलिए कानूनी रूप से वह प्रैक्टिसिंग एडवोकेट नहीं हैं, बल्कि सिर्फ कानून स्नातक हैं। इसका साफ मतलब है कि ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में वकील के रूप में बहस नहीं कर सकतीं। वह अदालत में याचिकाकर्ता के रूप में मौजूद रह सकती हैं, कार्यवाही देख सकती हैं और अपने वकीलों को निर्देश दे सकती हैं, लेकिन खुद जज के सामने कानूनी तर्क नहीं रख सकतीं।
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