दिल्ली/NCR

सर्दी ने खोली ‘साइलेंट किलर’ की पोल: दिल्ली-NCR की हवा दिमाग पर कर रही वार, मूड से याददाश्त तक सब हुआ टारगेट

Delhi AQI: जैसे ही सर्दी दस्तक देती है, दिल्ली-NCR की हवा में घुला ज़हर सिर्फ सांसें नहीं रोकता, बल्कि चुपचाप दिमागी सेहत पर भी हमला बोल देता है। हवा में तैरते सूक्ष्म कण खासतौर पर PM2.5 लोगों के मूड, सोचने की क्षमता और याददाश्त को इस कदर प्रभावित कर रहे हैं कि डॉक्टर इस दौर को ‘ब्रेन-स्ट्रेस सीजन’ तक कहने लगे हैं।

हवा में धुंध और धुआं

ठंड बढ़ते ही हवा में धुंध और धुआं जमीन के करीब अटक जाता है। इस समय शहर लगातार ‘वेरी पुअर’ से ‘सीवियर’ एयर क्वालिटी में फंसा रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे दिनों में चिड़चिड़ापन, बेचैनी, थकान, और ब्रेन-फॉग जैसी दिक्कतें तेजी से उभरती हैं। लोग साधारण बातों पर भी गुस्सा होने लगते हैं और मानसिक थकान इतनी बढ़ जाती है कि रोजमर्रा के काम भी भारी लगते हैं।

दिमाग पर कैसे हो रहा है वार?

नए शोध चौंकाने वाले हैं। एक 2025 की अंतरराष्ट्रीय स्टडी बताती है कि हाई PM2.5 के कुछ घंटों के एक्सपोजर के बाद ही उच्च-स्तरीय सोच और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है। यानी प्रदूषण वाले दिनों में दिमाग खुद को ‘सेफ मोड’ में धकेल देता है। लंबे समय तक इन्हीं कणों के संपर्क में रहना बच्चों और बुजुर्गों की याददाश्त और कॉग्निटिव फंक्शन को धीमा करता है।

मनोचिकित्सक की सलाह

सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. राजीव मेहता कहते हैं कि सर्दियों और प्रदूषण के महीनों में डिप्रेशन और एंजायटी के मरीजों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वे बताते हैं कि हानिकारक धुएं को देखकर दिमाग में घिन, बेचैनी और भय की भावना बढ़ जाती है। सांस लेने में दिक्कत होने लगे तो पैनिक अटैक तक आ सकते हैं।

दिमाग को नुकसान

इतना ही नहीं, यह हवा नर्व सेल्स को नुकसान पहुंचाकर दिमाग में सूजन पैदा करती है। कई अध्ययनों ने प्रदूषण को डिमेंशिया और अन्य न्यूरो-डिजेनरेटिव बीमारियों तक से जोड़ा है। Frontiers in Neuroscience में प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि PM2.5 दिमाग के सफेद पदार्थ को नुकसान पहुंचाकर न्यूरोट्रांसमीटर में गड़बड़ी पैदा करता है, जिससे मूड अस्थिर हो जाता है।

सर्दियां क्यों बनती हैं सबसे खतरनाक?

ठंड में हवा भारी हो जाती है और प्रदूषक जमीन के पास फंस जाते हैं। पराली, पटाखे और मौसम की स्थिरता स्मॉग को और जहरीला बना देती है। इस समय नींद की गुणवत्ता पर भी बड़ा असर पड़ता है। AIIMS ऋषिकेश के विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रदूषण बढ़ते ही स्लीप एप्निया और नींद की दिक्कतों के केस बढ़ने लगते हैं।

कैसे करें बचाव?

डॉक्टरों की सबसे बड़ी सलाह- एक्सपोजर कम करें
स्मॉग वाले दिनों में बाहर निकलना घटाएं
सुबह-शाम की प्रदूषण पीक से बचें
घर में एयर-प्यूरीफायर चलाएं
बाहर जाते समय N95 मास्क और चश्मा जरूर पहनें

सर्दियों की जहरीली हवा सिर्फ सांसें नहीं, मानसिक सेहत पर भी प्रहार कर रही है, इसलिए इस सीजन में सावधानी ही सबसे बड़ा कवच है।

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Shagun Chaurasia

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