Woman commits suicide after gangrape in Ghaziabad
Gangrape in Ghaziabad : गाजियाबाद के लोनी थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मानसिक रूप से कमजोर 23 वर्षीय युवती का शव गुरुवार सुबह उसके ही घर में फंदे से लटका मिला। चौंकाने वाली बात यह है कि दो दिन पहले ही इस युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। परिवार और पुलिस के मुताबिक, इस वारदात के बाद पीड़िता गहरे आघात में थी और लगातार परेशान नजर आ रही थी।
मामला लोनी की एक कॉलोनी का है। पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी बेटी को मंगलवार शाम बाइक सवार दो युवक घर के बाहर से अगवा कर ले गए थे। युवती मानसिक रूप से कमजोर थी और बोल व सुन नहीं पाती थी। उसका इलाज दिल्ली के एक अस्पताल में चल रहा था। जब वह किसी तरह घर वापस लौटी, तो इशारों से उसने पुलिस को बताया कि दो युवकों ने उसके साथ गलत काम किया। बयान के आधार पर पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी थी।
लेकिन बुधवार देर रात से ही युवती का व्यवहार असामान्य हो गया था। परिवार का कहना है कि वह चुपचाप रहती और आघात से बाहर नहीं निकल पा रही थी। गुरुवार सुबह करीब छह बजे उसका शव घर में चुन्नी से लटका मिला। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती जांच में पुलिस का मानना है कि युवती ने शर्मनाक वारदात से आहत होकर खुदकुशी की है। एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की पुष्टि होगी।
यह घटना एक बार फिर महिला सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दिल्ली से सटे गाजियाबाद और उसके आस-पास के इलाकों में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहे। पीड़िता मानसिक रूप से कमजोर थी और सबसे ज्यादा सुरक्षा की हकदार थी, लेकिन उसे अपराधियों ने अपना निशाना बना डाला। यह घटना न सिर्फ समाज की सोच पर बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी करारा तमाचा है।
देश में महिला सुरक्षा को लेकर तमाम कानून और नीतियां बनाई गई हैं, पर जमीनी हकीकत आज भी चिंताजनक है। निर्भया कांड के बाद कड़े कानून लागू किए गए थे, लेकिन अपराधियों के हौसले अब भी बुलंद दिखाई देते हैं। NCRB (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) के आंकड़े बताते हैं कि हर दिन औसतन 90 से अधिक रेप की घटनाएं देश में दर्ज होती हैं। इनमें बड़ी संख्या नाबालिग और कमजोर तबके की महिलाएं होती हैं।
युवती की आत्महत्या यह भी दर्शाती है कि दुष्कर्म जैसे अपराधों के बाद पीड़िता किस मानसिक पीड़ा से गुजरती है। समाज में आज भी बलात्कार पीड़िताओं को न्याय मिलने से पहले ताने, शर्मिंदगी और अलगाव का सामना करना पड़ता है। मानसिक रूप से कमजोर युवती के मामले में तो यह पीड़ा और भी दोगुनी हो जाती है। ऐसे मामलों में न केवल त्वरित न्याय बल्कि काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहयोग भी बेहद ज़रूरी है।
यह सवाल भी उठता है कि आखिर इस तरह की घटनाओं को रोकने में पुलिस, प्रशासन और समाज क्यों विफल हो रहे हैं। यदि मंगलवार को ही युवती की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती, तो शायद यह त्रासदी टाली जा सकती थी। अपराधियों का तत्काल पता लगाना, पीड़िता को सुरक्षित रखना और उसके परिवार को सहयोग देना पुलिस की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए थी।
गाजियाबाद की यह घटना एक चेतावनी है कि महिला सुरक्षा को लेकर अभी भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। समाज को पीड़िताओं के साथ खड़ा होना होगा, प्रशासन को अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करनी होगी और सबसे जरूरी है कि महिलाओं को न्याय और सुरक्षा का भरोसा मिलना चाहिए। वरना ऐसी घटनाएं केवल आंकड़ों का हिस्सा बनकर रह जाएंगी और हर बार एक परिवार तबाह हो जाएगा।
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