Land rights after 70 years
Lucknow News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर राज्य में बसे परिवारों को विधिसम्मत भूस्वामित्व अधिकार दिलाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह निर्णय उन हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है जो छह दशकों से अधिक समय से कानूनी भूमि अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहे थे। यह पहल उन हजारों परिवारों के लिए एक नई आशा की किरण लेकर आई है जो दशकों से अपने भूमि अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे और अब उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि यह केवल भूमि हस्तांतरण का मामला नहीं है, बल्कि उन परिवारों के जीवन संघर्ष को सम्मान देने और उन्हें न्याय दिलाने का अवसर है जिन्होंने विभाजन के दौरान अपना सब कुछ छोड़कर भारत में शरण ली थी। उन्होंने इसे “केवल पुनर्वास नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी” बताया और अधिकारियों से संवेदनशीलता के साथ इन परिवारों के साथ व्यवहार करने को कहा।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, 1960 से 1975 के बीच पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए दस हजार से अधिक परिवारों को उत्तर प्रदेश के पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बिजनौर और रामपुर जिलों में पुनर्वासित किया गया था। इन परिवारों को प्रारंभ में ट्रांजिट कैंपों के माध्यम से विभिन्न गांवों में बसाया गया और कृषि भूमि का आवंटन भी किया गया था, लेकिन कानूनी और अभिलेखीय विसंगतियों के कारण अधिकांश को आज तक वैध भूमिधारी अधिकार प्राप्त नहीं हो सके।
मुख्य समस्याओं में भूमि का वन विभाग के नाम दर्ज होना, नामांतरण प्रक्रिया का लंबित रहना, राजस्व अभिलेखों में त्रुटियां और कुछ मामलों में भूमि पर वास्तविक कब्जे का न होना शामिल है। कई परिवार दशकों से अपनी जमीन पर खेती कर रहे हैं और स्थायी आवास बना चुके हैं, लेकिन कागजों में उनका नाम दर्ज नहीं है। वहीं कुछ स्थानों पर ऐसे परिवारों के नाम जमीन दर्ज है जिनका अब कोई अस्तित्व ही नहीं है।विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण स्थिति यह है कि इन परिवारों को पहले गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के तहत भूमि आवंटित की गई थी, जो 2018 में निरस्त हो गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वर्तमान विधिक ढांचे में इन परिवारों के लिए नए कानूनी विकल्प तलाशे जाएं और समयबद्ध तरीके से इस समस्या का समाधान किया जाए।
योगी आदित्यनाथ ने इस पहल को “सामाजिक न्याय, मानवता और राष्ट्रीय जिम्मेदारी” का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह दशकों से उपेक्षित विस्थापित परिवारों के लिए गरिमापूर्ण जीवन का द्वार खोलने वाला निर्णय साबित होगा। उन्होंने जिलाधिकारियों को विशेष टीम गठित करके इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
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