जम्मू कश्मीर

4 दिन तक मुंह में फंसा रहा टिन का डिब्बा, सेना ने बचाई हिमालयन भालू की जान

Gurez Himalayan Bear Rescue: जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले की गुरेज घाटी से वन्यजीव संरक्षण और मानवीय संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक मामला सामने आया है। यहां एक हिमालयन भालू कई दिनों तक मुंह में फंसे टिन के डिब्बे के कारण गंभीर परेशानी झेल रहा था। समय रहते भारतीय सेना और वन विभाग की संयुक्त टीम ने उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर नई जिंदगी दी। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसे देखकर लोग सेना और वन विभाग की सराहना कर रहे हैं।

चार दिन तक दर्द में भटकता रहा भालू

जानकारी के अनुसार, गुरेज घाटी के खापुरी गांव के पास स्थानीय लोगों ने एक हिमालयन भालू को देखा, जिसके मुंह में टिन का कंटेनर फंसा हुआ था। कंटेनर की वजह से वह ठीक से खाना और पानी नहीं ले पा रहा था। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भालू करीब चार दिनों से इसी हालत में इलाके में घूम रहा था और लगातार परेशान दिखाई दे रहा था।

दुर्गम इलाके में चला रेस्क्यू अभियान

घटना की जानकारी मिलते ही भारतीय सेना और वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। गुरेज घाटी का यह क्षेत्र पहाड़ी और बेहद दुर्गम माना जाता है, जिससे रेस्क्यू अभियान आसान नहीं था। इसके बावजूद जवानों और वन विभाग के कर्मचारियों ने लगातार खोज अभियान चलाया। कई घंटों की मेहनत के बाद टीम ने भालू को सुरक्षित ढूंढ लिया और सावधानीपूर्वक उसके मुंह में फंसा टिन का डिब्बा निकाल दिया।

मेडिकल जांच के लिए भेजा गया भालू

रेस्क्यू के बाद भालू को वन विभाग की निगरानी में नजदीकी वन्यजीव पशु चिकित्सा केंद्र ले जाया गया। वहां विशेषज्ञों ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल भालू की स्थिति स्थिर है और उसे कुछ समय तक निगरानी में रखा जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया है।

वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश

विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र कई दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है। ऐसे में किसी जंगली जानवर की जान बचाना केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह घटना लोगों को भी जागरूक करती है कि प्लास्टिक, डिब्बे और अन्य कचरे को खुले में फेंकने से वन्यजीवों की जान खतरे में पड़ सकती है।

गुरेज घाटी में हिमालयन भालू का सफल रेस्क्यू भारतीय सेना और वन विभाग के समन्वय का बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया है। चार दिनों तक दर्द और भूख से जूझ रहे इस वन्यजीव को समय पर मिली मदद ने न सिर्फ उसकी जान बचाई, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भी मजबूत संदेश दिया है।

ये भी पढ़ें: https://newsindia24x7.tv/bareilly-kanwariya-tractor-trolley-tempo-accident-one-dead-23-injured/

Lavanya Dayal

Recent Posts

IIT बॉम्बे छात्र की मौत के बाद माता-पिता का अनशन, ‘प्रताड़ित करने वालों’ पर कार्रवाई की मांग

IIT Bombay Student Death: IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय BTech छात्र के माता-पिता ने मुंबई…

2 hours ago

‘वोट चोरी’ से होती है ‘कानून चोरी’: राहुल गांधी बोले- सांसदों के बनाए कानून भी अवैध

Rahul Gandhi Vote Chori Allegation: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य…

2 hours ago

AI की रफ्तार बढ़ी तो बढ़ेगा ई-कचरा, 2050 तक हर साल 6.1 करोड़ टन तक निकल सकता है वेस्ट

AI E-Waste: दुनिया में AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग मशीनों…

3 hours ago

मेरठ सेंट्रल मार्केट के 650 व्यापारियों को राहत, सरकार लाएगी विशेष पुनर्वास नीति

Meerut: मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण से प्रभावित करीब 650 व्यापारियों को…

4 hours ago

गोवा में वोटर डिलीट करने के बाद नाम नहीं हो सका बहाल; EC ने Form 7 का दिया हवाला

ECINet Voter Deletion Rollback: चुनाव आयोग ने India Today को बताया कि ECINet सिस्टम में…

4 hours ago

‘देशभर में होगा प्रदर्शन’: CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे में की इस्तीफे की मांग

CJP Gyanesh Kumar Resignation Demand: नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर Cockroach Janta Party (CJP)…

5 hours ago