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अरब मुल्कों में पीने के पानी पर संकट! ईरान ने बढ़ाया जंग का दायरा तो बूंद-बूंद को तरसेंगे लोग

Iran Gulf Water Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अब एक नई चिंता सामने आई है। कुवैत ने आरोप लगाया है कि ईरानी बलों ने दूसरी बार उसके डिसैलिनेशन (समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने वाले) प्लांट को निशाना बनाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तथा जल आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचे प्रभावित होते हैं, तो खाड़ी देशों में पीने के पानी का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

खाड़ी देशों के लिए क्यों अहम हैं डिसैलिनेशन प्लांट

खाड़ी क्षेत्र के अधिकांश देशों में प्राकृतिक मीठे पानी के स्रोत बेहद सीमित हैं। यहां वर्षा बहुत कम होती है और मौसम अधिकतर गर्म एवं शुष्क रहता है। ऐसे में समुद्र के खारे पानी को शुद्ध करके पीने योग्य बनाना ही इन देशों की जल आपूर्ति का प्रमुख आधार है। इसी कारण डिसैलिनेशन प्लांट इन देशों के लिए केवल औद्योगिक परियोजनाएं नहीं, बल्कि जीवनरेखा माने जाते हैं।

90 फीसदी जरूरत इन्हीं स्रोतों से होती है पूरी

रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी देशों में भूजल और डिसैलिनेशन प्लांट से मिलने वाले पानी के जरिए क्षेत्र की लगभग 90 प्रतिशत जल आवश्यकता पूरी की जाती है। यदि इन संयंत्रों का संचालन बाधित होता है, तो करोड़ों लोगों की पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

400 से अधिक डिसैलिनेशन प्लांट पर निर्भर है क्षेत्र

संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, सऊदी अरब, कतर, बहरीन और ओमान सहित खाड़ी तट पर 400 से अधिक डिसैलिनेशन प्लांट संचालित हैं। ये संयंत्र रोजाना बड़ी मात्रा में समुद्री पानी को शुद्ध कर घरों, उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंचाते हैं।

बढ़ते तनाव से बढ़ी वैश्विक चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ता है तथा जल आपूर्ति से जुड़ा बुनियादी ढांचा निशाने पर आता है, तो इसका असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा। ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के साथ-साथ मानवीय संकट भी गहरा सकता है।

सतर्कता बढ़ाने में जुटे खाड़ी देश

बढ़ते तनाव को देखते हुए कई खाड़ी देशों ने अपने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा बढ़ा दी है। जल आपूर्ति से जुड़े संयंत्रों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से निपटा जा सके।

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अब केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रह गया है। यदि डिसैलिनेशन प्लांट जैसे महत्वपूर्ण जल स्रोत प्रभावित होते हैं, तो खाड़ी देशों में पेयजल संकट गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे में क्षेत्रीय स्थिरता और आवश्यक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा आने वाले समय में सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगी।

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Lavanya Dayal

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