Sunday, Sep 13

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आनंद कुमार के बेटों को नहीं मिलेगी BSP में जगह, अब भतीजी को राजनीति में उतारेंगी मायावती

Mayawati BSP Family Politics: बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव के संकेत देते हुए स्पष्ट किया है कि उनके भाई आनंद कुमार के बेटों को कोई राजनीतिक पद नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि BSP को परिवारवाद से मुक्त रखना जरूरी है, ताकि समाज के अधिक लोगों को आंदोलन से जुड़ने का अवसर मिले।

मायावती ने X पर बताया कि संगठन में युवाओं को करीब 50% भागीदारी देने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के विधानसभा चुनावों में भी युवा चेहरों को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने Gen-Z और Gen-Alpha की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई पीढ़ी को जोड़ने और अंबेडकरवादी राजनीति व संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया।

दीपिका आनंद को मिल सकती है जिम्मेदारी

मायावती ने कहा कि वह अपने भाई-बहनों और उनके परिवार के युवाओं को सांसद, विधायक, मंत्री या अन्य राजनीतिक पदों से दूर रखती रही हैं। उन्होंने बताया कि अविवाहित होने और सुरक्षा की जरूरत के कारण आनंद कुमार को अपने साथ रखा, जो लंबे समय से पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।

हालांकि, भविष्य में आनंद कुमार को मदद की जरूरत पड़ने पर उनकी बेटी कुमारी दीपिका आनंद यह भूमिका निभा सकती हैं। दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। मायावती के मुताबिक ईमानदारी, निष्ठा और क्षमता के आधार पर उन्हें पार्टी में जिम्मेदारी दी जा सकती है। अगर वह तैयार नहीं होतीं, तो पार्टी की सहमति से किसी दलित मिशनरी कार्यकर्ता को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। उन्होंने कहा कि वह कांशीराम की तरह परिवारवाद के खिलाफ हैं।

BSP सरकार की उपलब्धियां गिनाईं

मायावती ने BSP की चार बार की सरकार का जिक्र करते हुए कानून-व्यवस्था, जनकल्याण और विकास को उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा ग्रामीण-शहरी विकास के साथ स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, छात्रावास, ट्रेनिंग सेंटर और पार्क बनाए गए। उनका दावा है कि इन नीतियों से प्रदेश से पलायन काफी हद तक रुका।

2012 में BSP की हार के लिए उन्होंने विरोधी दलों के जातिवादी रवैये को जिम्मेदार बताया। आरोप लगाया कि BSP सरकार के बाद कानून का राज कमजोर हुआ और विकास के दावे लोगों की समस्याएं दूर नहीं कर रहे। उन्होंने BSP को यूपी में सत्ता से रोकने के लिए साम-दाम-दंड-भेद अपनाने का भी आरोप लगाया और कार्यकर्ताओं से अंबेडकरवादी मिशन में जुटे रहने की अपील की।

निष्कासित नेताओं की वापसी की खबरें फेक

मायावती ने सोशल मीडिया पर BSP से निष्कासित नेताओं की वापसी से जुड़ी खबरों को फेक न्यूज बताया। उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निकाले गए नेताओं को दोबारा BSP में शामिल नहीं किया जाएगा।

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