Mumbai: मुंबई में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद करीब 31.35% यानी 21.2 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने की संभावना है। मुंबई में कुल 67.8 लाख मतदाता हैं। इनमें कुछ के नाम या उम्र जैसी जानकारी में गड़बड़ी मिली है, जबकि कुछ मतदाताओं का रिकॉर्ड मैप नहीं हो सका। जरूरी दस्तावेज नहीं देने पर उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।
31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में महाराष्ट्र के करीब 20.68 करोड़ में से 21.14% यानी 2.068 करोड़ नाम हटाए गए। मुंबई में नाम हटने की दर 34.75% रही। जिन लोगों का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, जिन्हें जानकारी सुधारनी है या आपत्ति दर्ज करनी है, वे 30 सितंबर तक दस्तावेजों के साथ दावा-आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। अंतिम सूची 4 नवंबर को जारी होगी। राज्य चुनाव कार्यालय के अनुसार, 76.8 लाख मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके हैं, 75.5 लाख अनुपस्थित मिले, 34.8 लाख की मृत्यु हो चुकी है और 17.6 लाख एक से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत पाए गए। करीब 2.23 लाख लोगों ने अपने पते पर मौजूद होने के बावजूद पंजीकरण से इनकार किया।
मुंबई जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, 32,037 मतदाताओं के विवरण में गड़बड़ी है, जबकि 13.9 लाख मतदाता अनमैप्ड हैं क्योंकि वे 2004 के SIR के रिकॉर्ड नहीं दिखा सके। इन्हें पंजीकृत पते या WhatsApp पर नोटिस भेजकर नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज मांगे जाएंगे। नाम और चुनावी विवरण में गड़बड़ी के लिए भी प्रमाण देना होगा। सुनवाई के लिए 968 सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी लगाए गए हैं।
विपक्षी दलों ने दावा-आपत्ति की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। मुंबई कांग्रेस नेता संदेश कोंडविलकर ने बूथवार गड़बड़ियों और अनमैप्ड मतदाताओं की जानकारी सार्वजनिक करने, उनकी श्रेणियां बताने और सुनवाई के लिए अधिक अधिकारी व कार्यालय बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुस्लिम इलाकों में ज्यादा गड़बड़ियां मिली हैं, इसलिए उन्हें निष्पक्ष मौका मिलना चाहिए।
ECI ने राजनीतिक दलों और सिविल सोसाइटी की मांग पर महाराष्ट्र में SIR की समयसीमा दूसरी बार बढ़ाकर 17 अगस्त की थी। पहले यह 29 जुलाई और फिर 8 अगस्त तक तय थी। मई में ECI ने 20 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में तीसरे चरण की घोषणा की थी। इसके पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरा देश SIR के दायरे में आ जाएगा। इस चरण में 4 लाख बूथ लेवल अधिकारियों को 36.73 करोड़ मतदाताओं के घर-घर जाकर सत्यापन का जिम्मा दिया गया। पहले दो चरणों में 13 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 59 करोड़ मतदाता शामिल थे। SIR का उद्देश्य फर्जी, डुप्लीकेट और अपात्र मतदाताओं, मृत लोगों और “अवैध प्रवासियों” के नाम हटाना है।
विपक्ष SIR को लेकर लगातार सवाल उठाता रहा है और इसे BJP को फायदा पहुंचाने वाला मतदाता सूची “क्लीन-अप” अभियान बताता है। पश्चिम बंगाल में भी यह प्रक्रिया बेहद विवादित रही। 10 अप्रैल को ECI ने करीब 90 लाख नाम हटाने की घोषणा की थी, जिनमें 27 लाख “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” श्रेणी में थे। BJP और TMC के बीच वोटों का अंतर भी हटाए गए नामों के करीब था। TMC ने कहा कि इससे BJP को चुनाव जीतने में मदद मिली, जबकि 294 में से 207 सीटें जीतकर पहली बार सत्ता में आई BJP ने इस दावे को खारिज कर दिया।
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