बाज़ार में भूचाल!
Global Market Impact: गुरुवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी झटके से कम नहीं रही। जहां एक तरफ निवेशकों की उम्मीदें बुधवार की तेजी के बाद मजबूत दिख रही थीं, वहीं आज बाजार ने अचानक यू-टर्न लेते हुए भारी गिरावट दर्ज की। सेंसेक्स करीब 1400 अंकों तक टूट गया और निफ्टी भी 22,250 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। इस तेज गिरावट ने निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल पैदा कर दिया।
सुबह के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स लगभग 1.9% गिरकर 71,700 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी करीब 400 अंकों की कमजोरी देखी गई। सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और फार्मा सेक्टर के शेयरों पर दिखा, जहां तेज बिकवाली देखने को मिली। बाजार में इस गिरावट के पीछे वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव को बड़ा कारण माना जा रहा है।
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा, जहां विदेशी निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। आंकड़ों के मुताबिक, एक ही दिन में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।
जहां शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली, वहीं दूसरी तरफ भारतीय रुपये ने मजबूती का शानदार प्रदर्शन किया। हाल ही में ऐतिहासिक गिरावट झेलने के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले जोरदार तरीके से उभरा है। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 151 पैसे मजबूत होकर 93.19 के स्तर तक पहुंच गया।
इस मजबूती के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का सख्त कदम अहम माना जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने ‘ऑनशोर फॉरवर्ड डिलीवरी’ मार्केट में बैंकों की नेट ओपन पोजीशन पर सख्त सीमा तय कर दी है। इस फैसले का मकसद रुपये में हो रही तेज गिरावट पर लगाम लगाना है। आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे तय सीमा के भीतर अपनी पोजीशन को जल्द से जल्द समायोजित करें।
गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले रुपया 95 के पार पहुंच गया था, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया था। ऐसे में आरबीआई का यह कदम बाजार में स्थिरता लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
हालांकि रुपये की वापसी राहत जरूर दे रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर कई ऐसे कारक हैं जो अब भी चिंता बढ़ा रहे हैं। डॉलर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिल रही है, जिससे अन्य मुद्राओं पर दबाव बना हुआ है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए बड़ा झटका है। इससे देश का आयात बिल बढ़ेगा और महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।
भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, एक ही दिन में FII ने 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की है। यह ट्रेंड बाजार में कमजोरी का संकेत दे रहा है और निवेशकों के भरोसे को भी प्रभावित कर रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि महंगे कच्चे तेल, बढ़ते व्यापार घाटे और वैश्विक अनिश्चितता के चलते विदेशी निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।
इन तमाम चुनौतियों के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था से एक सकारात्मक संकेत भी मिला है। मार्च महीने में जीएसटी कलेक्शन में करीब 9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह आंकड़ा 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। यह दर्शाता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।
फिलहाल स्थिति मिली-जुली नजर आ रही है। एक तरफ आरबीआई के कदमों से रुपये को सहारा मिला है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक तनाव, महंगा तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार के लिए खतरे की घंटी बने हुए हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने और सोच-समझकर फैसले लेने का है।
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