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त्रिपुरा DGP अनुराग धनखड़ की मौत की गुत्थी बरकरार, खुदकुशी या साजिश? परिवार ने उठाए सवाल

Tripura DGP Anurag Dhankar Death: त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ की मौत का रहस्य अभी तक सुलझ नहीं पाया है। 20 जुलाई 2026 को अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय में उनके कार्यालय के वॉशरूम से उनका शव फंदे से लटका मिला था। शुरुआती तौर पर इसे खुदकुशी का मामला माना जा रहा है, लेकिन अब तक कोई सुसाइड नोट सामने नहीं आया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर DGP ने आत्महत्या की तो इसकी वजह क्या थी? परिवार का कहना है कि अनुराग धनखड़ ऐसा कदम कभी नहीं उठा सकते थे। वहीं, अगर उनकी मौत के पीछे कोई साजिश है तो उसकी कड़ियां क्या हैं? इस मामले को लेकर त्रिपुरा सरकार और पुलिस की चुप्पी ने भी रहस्य और बढ़ा दिया है।

बागपत में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

अनुराग धनखड़ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिहारीगढ़ के रहने वाले थे, जबकि उनके भाई बड़ौत में रहते हैं। पोस्टमॉर्टम के बाद उनका शव पैतृक गांव लाया गया, जहां त्रिपुरा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस के आला अधिकारी भी पहुंचे। उनकी मौजूदगी में बड़ौत में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

इस दौरान अनुराग धनखड़ के भाई ने कहा कि जिस परिस्थिति में उनके भाई की मौत हुई, उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि अनुराग धनखड़ ने अपने कार्यकाल में कई बड़े घोटालों की जांच की थी। इसलिए उनकी मौत की जांच में इस पहलू को भी शामिल किया जाना चाहिए।

पुलिस ने शुरू की जांच

त्रिपुरा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय में उनके कार्यालय से फॉरेंसिक नमूने जुटाए गए हैं। इसके अलावा पुलिस उनके मोबाइल फोन और लैपटॉप की भी जांच कर रही है, ताकि मौत की वास्तविक वजह का पता लगाया जा सके।

मौत से महज 48 घंटे पहले, 18 जुलाई को त्रिपुरा पुलिस के 92वें बैच की पासिंग आउट परेड हुई थी। इसमें मुख्यमंत्री के साथ DGP अनुराग धनखड़ भी मौजूद थे। उन्होंने नए पुलिसकर्मियों को संबोधित भी किया था। उस कार्यक्रम की तस्वीरों में वह सामान्य नजर आ रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह बतौर DGP उनकी आखिरी पासिंग आउट परेड साबित होगी।

20 जुलाई को क्या हुआ?

20 जुलाई की सुबह करीब 10:30 बजे अनुराग धनखड़ अपनी सरकारी गाड़ी से अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय पहुंचे। आमतौर पर कार्यालय पहुंचने के बाद वह वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ सुबह की बैठक करते थे। लेकिन उस दिन उन्होंने कार्यालय में मौजूद गार्ड और अपने पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) से कहा कि उन्हें कोई परेशान न करे, क्योंकि वह कुछ जरूरी काम में व्यस्त हैं। इसके बाद वह अपने कमरे में चले गए।

करीब डेढ़ घंटे बाद, दोपहर 12 बजे तक, उनके कार्यालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस दौरान लैंडलाइन और मोबाइल पर कई कॉल आईं, लेकिन उन्होंने किसी का जवाब नहीं दिया। यह उनके सामान्य व्यवहार से अलग था। इसके बाद गार्ड, PSO और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को संदेह हुआ और उन्होंने उनके कमरे में जाने की कोशिश की।

दरवाजा अंदर से बंद था। पिछले करीब 10 महीनों में, जब से अनुराग धनखड़ DGP बने थे, उनका कार्यालय कभी अंदर से बंद नहीं हुआ था। आवाज देने और दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। आखिरकार अधिकारियों ने दरवाजा तोड़ने का फैसला किया।

वॉशरूम में मिला शव

दरवाजा टूटने के बाद अधिकारी कमरे में दाखिल हुए, लेकिन अनुराग धनखड़ अपनी कुर्सी पर नहीं थे। पूरे कार्यालय की तलाश के दौरान एक पुलिस अधिकारी ने वॉशरूम में देखा, जहां DGP का शव फंदे से लटका मिला।

यह बेहद असामान्य घटना थी, क्योंकि किसी राज्य के सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का शव पुलिस मुख्यालय के भीतर उनके ही कार्यालय में मिला था। पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में शव को फंदे से उतारा गया और एंबुलेंस से उन्हें गोविंद बल्लभ अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उन्हें सीपीआर देना शुरू किया। काफी प्रयासों के बावजूद उनकी सांसें वापस नहीं आ सकीं और दोपहर 12:48 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

शुरुआत में यह अफवाह भी फैली थी कि DGP ने खुद को गोली मार ली है, लेकिन उनके शरीर पर गोली या किसी अन्य चोट के निशान नहीं मिले। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होने की उम्मीद है।

खुदकुशी की वजह पर सवाल

अगर अनुराग धनखड़ ने आत्महत्या की थी तो इसके पीछे की वजह अब तक स्पष्ट नहीं है। अभी तक कोई सुसाइड नोट सामने नहीं आया है। हालांकि, यह भी संभव है कि जांच पूरी होने तक पुलिस ने इससे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक न की हो।

शुरुआती जांच में सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आया है कि अनुराग धनखड़ और उनकी पत्नी के रिश्ते तनावपूर्ण थे और दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। बताया जा रहा है कि रविवार रात भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। इसके बाद सोमवार सुबह वह घर से सीधे पुलिस मुख्यालय पहुंचे और कुछ घंटों बाद उनका शव मिला। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

तीन दशक का बेदाग करियर

1994 बैच के IPS अधिकारी अनुराग धनखड़ पिछले साल मई में त्रिपुरा के DGP बने थे। उनका नियमित कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो चुका था, लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें सेवा विस्तार दिया था। उनके परिवार में पत्नी और एक बेटा है, जो कनाडा में रहता है।

करीब तीन दशक के करियर में अनुराग धनखड़ की छवि एक ईमानदार और बेदाग अधिकारी की रही। उन्होंने त्रिपुरा पुलिस के अलावा प्रतिनियुक्ति पर BSF, CISF, संयुक्त राष्ट्र की पीसकीपिंग फोर्स और CBI में भी काम किया था। CBI में रहते हुए वह उस जांच टीम का हिस्सा रहे, जिसने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले की जांच की थी, जिसमें नीरव मोदी मुख्य आरोपी था। वह 1984 के सिख दंगों की जांच से भी जुड़े रहे थे।

त्रिपुरा का DGP बनने से पहले वह राज्य की इंटेलिजेंस शाखा के प्रमुख भी रह चुके थे। अब उनकी रहस्यमयी मौत को लेकर कई सवाल खड़े हैं—क्या यह वास्तव में आत्महत्या थी, इसकी वजह क्या थी, सुसाइड नोट क्यों नहीं मिला और क्या उनकी मौत के पीछे किसी साजिश की आशंका है? इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही मिल पाएंगे।

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Tanisha Verma

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