Saturday, Sep 26

होम = News Big = क्लास 8 की NCERT किताब में न्यायपालिका पर विवाद! CJI की नाराजगी से हरकत में सरकार, किताब से हटेगा विवादित हिस्सा

क्लास 8 की NCERT किताब में न्यायपालिका पर विवाद! CJI की नाराजगी से हरकत में सरकार, किताब से हटेगा विवादित हिस्सा

NCERT Class 8 Textbook: कक्षा 8 के छात्रों के लिए जारी NCERT की नई सोशल साइंस पाठ्यपुस्तक इन दिनों बड़े विवाद के केंद्र में है। किताब में न्यायपालिका की भूमिका पर लिखे गए एक अध्याय में अदालतों में लंबित मामलों और कथित भ्रष्टाचार का ज़िक्र किया गया है, जिसे लेकर सरकार और न्यायपालिका दोनों ने गंभीर आपत्ति जताई है।

क्या है पूरा मामला

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस अध्याय में न्यायपालिका को जिस तरह से केंद्र में रखकर प्रस्तुत किया गया है, वह संतुलित नहीं है। सरकार का मानना है कि यदि सिस्टम की कमजोरियों पर चर्चा करनी थी, तो कार्यपालिका और विधायिका जैसे अन्य संवैधानिक अंगों का भी समान रूप से उल्लेख होना चाहिए था। केवल न्यायपालिका को निशाना बनाना न तो उचित है और न ही शैक्षणिक दृष्टि से सही।

किताब से हटेगा विवादित हिस्सा

सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि कक्षा 8 की किताब से न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ा हिस्सा हटाया जाएगा। इसके साथ ही, इस सामग्री को शामिल करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इतनी कम उम्र के छात्रों के लिए इस तरह की एकतरफा और संवेदनशील सामग्री उनके मन पर गलत प्रभाव डाल सकती है।

मुख्य न्यायाधीश की कड़ी प्रतिक्रिया

इस पूरे विवाद पर Supreme Court of India के मुख्य न्यायाधीश Justice Suryakant ने भी अप्रसन्नता जताई है। उन्होंने कहा कि किसी को भी न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। CJI ने संकेत दिए हैं कि आवश्यकता पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर सकता है।

किताब में क्या है लिखा गया?

NCERT की अपडेटेड कक्षा 8 सोशल साइंस पुस्तक में “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” नामक अध्याय शामिल है। इसमें न्याय व्यवस्था की चुनौतियों, अदालतों में लंबित मामलों और सिस्टम की कुछ कमजोरियों पर चर्चा की गई है। इसी हिस्से में भ्रष्टाचार का उल्लेख किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।

सरकार का तर्क

सरकार का कहना है कि अगर संस्थागत कमियों पर पढ़ाना ही था, तो न्यायपालिका के साथ-साथ विधायिका और कार्यपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार या चुनौतियों को भी समान रूप से शामिल किया जाना चाहिए था। केवल एक संस्था को चुनकर पेश करना न तो निष्पक्ष है और न ही शैक्षणिक संतुलन के अनुरूप। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि NCERT पाठ्यपुस्तक में क्या बदलाव करता है और क्या इस मामले में कोई औपचारिक कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ती है।

ये भी पढ़ें: 39 साल पुराना विमान, 6,600 घंटे की उड़ान, झारखंड एयर एंबुलेंस हादसे ने खोले चौंकाने वाले राज