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भाद्रपद पूर्णिमा 2026: घर में होगा मां लक्ष्मी का वास, आज रात करें ये उपाय

Bhadrapada Purnima 2026: भाद्रपद पूर्णिमा को शास्त्रों में बेहद दिव्य बताया गया है। इस दिन पितरों की विधिवत पूजा का विधान बताया गया है। मान्यता है कि पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करने से पितृदोष दूर होता है। वहीं, भादो पूर्णिमा की रात को भी धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। शाम के समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। भगवान को मखाने की खीर का भोग लगाएं। इसके बाद श्रद्धा के अनुसार कनकधारा स्तोत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया जा सकता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की कामना पूरी होती है।

मां लक्ष्मी को चढ़ाएं पीली कौड़ियां और चंद्रमा को दें अर्घ्य

भाद्रपद पूर्णिमा की पूजा के दौरान मां लक्ष्मी के चरणों में 5 साबुत पीली कौड़ियां और अक्षत रखें। पूजा पूरी होने के बाद इन्हें लाल रेशमी कपड़े में बांधकर धन रखने वाली जगह या तिजोरी में रखा जा सकता है। इसे आर्थिक समृद्धि से जुड़ा पारंपरिक उपाय माना जाता है। पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा करने की भी परंपरा है। एक पात्र में साफ जल, थोड़ा कच्चा दूध, अक्षत और सफेद फूल लेकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इस दौरान 'ॐ चंद्राय नमः' मंत्र का तीन बार जाप किया जा सकता है।

सफेद चीजों का दान और पीपल पर जल चढ़ाएं

भाद्रपद पूर्णिमा पर दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। संध्याकाल में पूजा के बाद गरीबों को सफेद तिल, चावल, दूध, दही, घी या चांदी से बनी चीजों का दान किया जा सकता है। इसके अलावा खाद्य सामग्री या सामर्थ्य के अनुसार धन का दान भी किया जा सकता है। भाद्रपद के अंतिम दिन पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाने और दीपक जलाने की धार्मिक परंपरा भी बताई गई है। दिए गए उपाय के अनुसार पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाया जा सकता है। इसे श्रद्धा और धार्मिक आस्था से जुड़ा उपाय माना जाता है।

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