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बिरयानी रेस्तरां ने छिपाई 70000 करोड़ रुपये की बिक्री, आयकर विभाग ने AI टूल का इस्तेमाल कर पकड़ा बड़ा घपला

by | Feb 19, 2026 | Cover Story Top, देश

Hyderabad tax evasion case: हैदराबाद के बिरयानी रेस्तरां पर नियमित जांच के दौरान आयकर विभाग ने एक बड़े पैमाने के कर चोरी नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि 2019-20 से अब तक करीब 70,000 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाई गई। अधिकारियों के अनुसार, कई रेस्तरां एक लोकप्रिय ऑल-इंडिया बिलिंग सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल कर अपने वास्तविक कारोबार को कम दिखा रहे थे।

यह कार्रवाई आयकर अधिनियम की धारा 133ए के तहत की गई, जिसमें छह वित्तीय वर्षों (2019-20 से 2025-26) के लगभग 60 टेराबाइट लेनदेन डेटा की जांच की गई। बताया गया कि इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल एक लाख से अधिक रेस्तरां करते हैं और यह देश के लगभग 10% रेस्तरां बाजार से जुड़ा है।

2.43 लाख करोड़ के बिलों की जांच

जांच के दौरान करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये की कुल बिलिंग का विश्लेषण किया गया। इसमें 13,317 करोड़ रुपये के लेनदेन को “बिलिंग के बाद हटाया गया” पाया गया, जिससे संगठित तरीके से बिक्री डेटा में छेड़छाड़ के संकेत मिले। अहमदाबाद स्थित सॉफ्टवेयर कंपनी के सर्वर तक पहुंच मिलने के बाद हैदराबाद के आयकर विभाग की डिजिटल लैब में फोरेंसिक जांच की गई।

अधिकारियों ने 1.77 लाख रेस्तरां आईडी से जुड़े डेटा को खंगालने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई टूल्स का इस्तेमाल किया तथा ओपन-सोर्स सूचनाओं के आधार पर जीएसटी और पैन नंबरों का मिलान किया।

कैसे की जा रही थी टैक्स चोरी

जांच में कई तरीके सामने आए जिनसे कथित तौर पर आय छिपाई जा रही थी:

  1. नकद बिल हटाना
    रेस्तरां सभी भुगतान (कार्ड, यूपीआई और नकद) सिस्टम में दर्ज करते थे, लेकिन रिटर्न भरने से पहले नकद लेनदेन के कुछ बिल मिटा दिए जाते थे ताकि आय कम दिखाई दे।
  2. समूह में रिकॉर्ड डिलीट करना
    कुछ मामलों में विशेष तारीखों के पूरे बिलिंग रिकॉर्ड, कभी-कभी 30 दिन तक के डेटा हटा दिए जाते थे और आयकर में वास्तविक बिक्री का छोटा हिस्सा ही दिखाया जाता था।
  3. कम आय घोषित करना
    कुछ संस्थानों ने बिलिंग डेटा हटाए बिना ही आयकर रिटर्न में कारोबार को कम बताया।

राज्यों में मिली भारी गड़बड़ी

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 3,734 पैन के विश्लेषण से करीब 5,141 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाने का अनुमान लगा। केवल 40 रेस्तरां की विस्तृत जांच में ही लगभग 400 करोड़ रुपये की अनियमितता सामने आई और कुछ मामलों में 27% तक बिक्री दर्ज नहीं की गई थी। राज्यवार आंकड़ों में कर्नाटक में सबसे ज्यादा लगभग 2,000 करोड़ रुपये की कर चोरी सामने आई। इसके बाद तेलंगाना (1,500 करोड़ रुपये) और तमिलनाडु (1,200 करोड़ रुपये) रहे। जांच में महाराष्ट्र और गुजरात भी शामिल हैं।

जांच का दायरा बढ़ा

शुरुआत में कार्रवाई हैदराबाद तक सीमित थी, लेकिन बाद में विशाखापत्तनम और तेलंगाना-आंध्र प्रदेश के अन्य शहरों तक पहुंची। अब केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने पूरे देश में जांच का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल मामला एक विशेष बिलिंग सॉफ्टवेयर से जुड़ा है, लेकिन जरूरत पड़ने पर अन्य प्रणालियों की भी जांच की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया कि कारोबार छिपाने और टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।