Monday, Sep 28

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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, CBSE कक्षा 6 के छात्रों को अनिवार्य तीसरी भाषा से मिले छूट

CBSE Three Language Policy: सुप्रीम कोर्ट ने CBSE में मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को अनिवार्य तीन-भाषा नीति से उसी तरह की छूट देने का निर्देश दिया है, जैसी राहत कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को दी गई है। कोर्ट ने कहा कि कक्षा 6 के छात्रों के लिए इस नीति को 1 अप्रैल 2027 से लागू किया जाए।

यह निर्देश केंद्र सरकार के उस रुख के बाद आया, जिसमें उसने इस साल कक्षा 6 के छात्रों को नीति से छूट देने से इनकार किया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने विस्तृत चर्चा के बाद तय किया है कि कक्षा 6 के छात्रों को इसी साल से तीसरी भाषा पढ़नी चाहिए।

केंद्र ने बताया कि करीब 2,800 CBSE स्कूलों में लगभग 99% ने तीसरी भाषा की नीति अपना ली है और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उसके अनुसार करीब 1.2% स्कूल ही इससे प्रभावित हैं। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 के छात्रों के समान राहत देने का आदेश दिया।

अचानक भाषा बदलने पर कोर्ट की चिंता

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उन छात्रों को लेकर चिंता जताई, जिन्होंने पहले ही अपनी भाषाएं चुन ली हैं और अब बीच में भाषा बदलने की स्थिति बन रही है। CJI सूर्यकांत ने वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाकर याचिकाकर्ता स्कूलों और पक्षकारों से उनकी समस्याएं समझने का सुझाव दिया। हालांकि, अभिभावकों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने किसी और समिति का विरोध किया। उन्होंने कहा कि छात्रों को कक्षा 4 से पढ़ाई जा रही भाषा बदलने के लिए कहा जा रहा है और अब मामले पर स्पष्ट निर्णय होना चाहिए।

स्पेनिश से संस्कृत करने का मुद्दा

अभिभावकों के वकीलों ने कहा कि भाषा नीति में अचानक बदलाव से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता पर भी सवाल उठाया और कहा कि किताबें पहले ऑनलाइन भी उपलब्ध नहीं थीं तथा अब भी छात्रों को उनकी भौतिक प्रतियां नहीं मिली हैं। DPS का उदाहरण देते हुए शंकरनारायणन ने बताया कि वहां छात्र कक्षा 4 से स्पेनिश पढ़ रहे थे। स्पेनिश की छह सेक्शन में करीब 50-50 छात्र हैं और अब उन्हें संस्कृत पढ़ने के लिए कहा गया है।

उन्होंने कहा कि मुद्दा संस्कृत, स्पेनिश या जर्मन में से किसी भाषा को बेहतर बताने का नहीं है। उनका तर्क था कि NEP के अनुसार किसी भाषा को थोपा नहीं जाना चाहिए और व्यवस्था संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने अंग्रेजी को गैर-मूल भाषा की श्रेणी में रखने पर भी सवाल उठाया।

कोर्ट बोला- छात्रों को कठिनाई नहीं, सुविधा चाहिए

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि कोर्ट नहीं चाहता कि भाषा बदलने के कारण छात्रों को अतिरिक्त परेशानी हो। तुषार मेहता ने कहा कि छात्र सीमित संख्या में हैं और वे बदलाव के अनुसार ढल जाएंगे। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि कोर्ट छात्रों को कठिनाई नहीं, बल्कि “comfort” देना चाहता है। इसके बाद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 के छात्रों के समान राहत मिलेगी और नीति 1 अप्रैल 2027 से लागू की जाएगी।

कोर्ट ने कहा कि वह CBSE पर फिलहाल रोक नहीं लगा रहा है और अनिवार्य भाषा की व्यापक व्यवस्था पर बाद में विचार किया जाएगा। केंद्र ने किताबें उपलब्ध होने की बात कही, जबकि अभिभावकों की ओर से कहा गया कि किताबें केवल ऑनलाइन उपलब्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की है। केंद्र को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा और उसके बाद याचिकाकर्ताओं को दो सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

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