CBSE Three Language Policy: CBSE की तीन भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अहम सुझाव सामने आया है। अदालत ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से कहा कि वह कक्षा 6 से तीन भाषा फॉर्मूला लागू करने के फैसले को टालने पर विचार करे। कोर्ट का सुझाव मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। CBSE की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि बोर्ड इस सुझाव पर संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा करेगा और इसके बाद अदालत को अपनी प्रतिक्रिया देगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर मौजूदा कक्षा 6 के छात्र इसी साल से तीन भाषाएं पढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें इसकी अनुमति दी जा सकती है। वहीं, व्यापक छात्र हित को देखते हुए अगले साल से इस नीति को लागू करने पर पुनर्विचार किया जा सकता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि ये सुझाव बिना किसी पूर्वाग्रह के दिए जा रहे हैं और मामले के मूल कानूनी मुद्दों पर बाद में फैसला किया जाएगा।
क्या है CBSE की तीन भाषा नीति?
CBSE की ओर से जारी नीति के तहत कक्षा 9 के छात्रों के लिए 1 जुलाई 2026 से तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है। इनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए। विदेशी भाषा को तीसरी भाषा के तौर पर तभी चुना जा सकता है, जब छात्र दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन कर रहा हो। CBSE ने यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCF-SE) 2023 के अनुरूप बताया है।
कक्षा 6 पर अगले साल लागू होना है नियम
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार तीन भाषा फॉर्मूले का विस्तार कक्षा 6 तक किया जाना है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी को लेकर CBSE से टाइमलाइन पर पुनर्विचार करने को कहा है। अदालत ने इससे पहले भी छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव को लेकर चिंता जताई थी और नीति को लागू करने के व्यावहारिक पहलुओं पर विचार करने की बात कही थी।
नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
CBSE की तीन भाषा नीति को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। अदालत ने मई 2026 में इन याचिकाओं पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी और केंद्र, CBSE तथा NCERT से जवाब मांगा था। फिलहाल तीन भाषा नीति को लेकर अंतिम कानूनी फैसला आना बाकी है। CBSE अब सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर अपना जवाब देगा।
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