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21 बार SSB में रिजेक्ट हुए दीपक रावत, 22वीं कोशिश में बने लेफ्टिनेंट, लाखों की नौकरी भी छोड़ी

Deepak Singh Rawat Success Story: इंजीनियर के तौर पर अच्छी कॉरपोरेट नौकरी करने के बावजूद दीपक सिंह रावत ने सेना में अफसर बनने का सपना नहीं छोड़ा. SSB में लगातार 21 बार असफल होने के बाद उन्होंने 22वीं कोशिश में सफलता हासिल की और भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए.

नई दिल्ली: भारतीय सेना में अफसर बनने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए दीपक सिंह रावत की कहानी किसी मिसाल से कम नहीं है. लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी और आखिरकार 22वीं बार में SSB पास कर सेना में लेफ्टिनेंट बनने का सपना पूरा कर लिया.

दीपक के लिए यह सफर आसान नहीं था. उन्हें SSB में 21 बार असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन हर बार उन्होंने अपनी कमियों को सुधारकर दोबारा तैयारी की. इंजीनियर के तौर पर उनके पास अच्छी कॉरपोरेट नौकरी भी थी, लेकिन सेना में जाने की चाहत के आगे उन्होंने उस करियर को भी पीछे छोड़ दिया.

21 असफलताओं के बाद 22वीं कोशिश में मिली कामयाबी

आकाशवाणी से बातचीत में दीपक सिंह रावत ने अपनी सफलता की कहानी साझा की. उन्होंने बताया कि भारतीय सेना में अधिकारी बनने के लिए उन्होंने लगातार प्रयास किए.

SSB में 21 बार असफल होने के बाद आखिरकार 22वें प्रयास में उनका चयन हो गया. इसके बाद उन्हें भारतीय सेना की 19 राजपूत रेजीमेंट में कमीशन मिला.

दीपक ने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी यानी OTA गया से प्रशिक्षण पूरा किया और पासिंग आउट के दौरान उन्हें सिल्वर मेडल भी मिला.

चार साल कॉरपोरेट नौकरी भी की

सेना में जाने से पहले दीपक सिंह रावत निजी क्षेत्र में नौकरी कर रहे थे. उन्होंने एक कॉरपोरेट कंपनी में करीब चार साल तक असिस्टेंट टेक्निकल इंजीनियर के रूप में काम किया.

एक तरफ उनके पास इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने का मौका था, वहीं दूसरी ओर सेना में अफसर बनने की इच्छा लगातार बनी हुई थी. इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने बार-बार SSB का सामना किया.

इतनी बार SSB कैसे दे पाए?

दीपक के 21 बार SSB में असफल होने की बात सुनकर कई लोगों के मन में सवाल उठ सकता है कि कोई उम्मीदवार इतनी बार SSB में शामिल कैसे हो सकता है.

डिफेंस परीक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, उम्मीदवार को अलग-अलग एंट्री और पात्रता के आधार पर SSB में कई अवसर मिल सकते हैं. इसलिए अलग-अलग प्रविष्टियों के जरिए किसी उम्मीदवार का कई बार SSB में शामिल होना संभव है.

दीपक की कहानी इस बात को दिखाती है कि लगातार असफलता मिलने के बावजूद प्रयास जारी रखा जाए तो सफलता हासिल की जा सकती है.

स्पर्श छेत्री भी बने सेना के अधिकारी

OTA की पासिंग आउट परेड में दीपक के अलावा स्पर्श छेत्री की कहानी ने भी ध्यान खींचा. स्पर्श छेत्री ने अपने परिवार की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भारतीय सेना में कमीशन हासिल किया.

स्पर्श राजपूताना राइफल्स में लेफ्टिनेंट के रूप में शामिल हुए हैं. उन्होंने बताया कि वह अपने परिवार की सेना में शामिल होने वाली पांचवीं पीढ़ी हैं.

परिवार की पांचवीं पीढ़ी ने पहनी सैन्य वर्दी

स्पर्श के लिए सेना में शामिल होना सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर भी है. उनके परिवार में पहले भी कई पीढ़ियां भारतीय सेना से जुड़ी रही हैं.

इस तरह एक तरफ दीपक ने 21 असफलताओं के बाद सफलता हासिल की, तो दूसरी तरफ स्पर्श ने अपने परिवार की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया.

OTA में हुई पासिंग आउट परेड

5 सितंबर 2026 को ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी गया और चेन्नई में पासिंग आउट परेड आयोजित की गई. दोनों अकादमियों से कुल 595 नए सैन्य अधिकारी देश को मिले.

OTA चेन्नई में SSC-122 और SSCW-36 बैच की पासिंग आउट परेड के जरिए कुल 342 कैडेट भारतीय सेना का हिस्सा बने.

वहीं, बिहार के गया स्थित OTA में शॉर्ट सर्विस कमीशन टेक्निकल एंट्री के चौथे बैच की पासिंग आउट परेड हुई, जिसमें 253 नए सैन्य अधिकारियों ने प्रशिक्षण पूरा किया.

दीपक की कहानी युवाओं के लिए बनी मिसाल

दीपक सिंह रावत की कहानी की सबसे खास बात उनकी लगातार कोशिश है. 21 बार मिली असफलता के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा.

कॉरपोरेट नौकरी और सुरक्षित करियर के विकल्प के बावजूद सेना में जाने का जुनून बनाए रखना और 22वीं कोशिश में सफलता हासिल करना उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो शुरुआती असफलताओं के बाद अपना लक्ष्य छोड़ देते हैं.