DTC Drivers Strike: दिल्ली में DTC ड्राइवरों की हड़ताल का असर लगातार तीसरे दिन भी साफ दिखाई दिया। गुरुवार को राजधानी के अलग-अलग बस डिपो में बड़ी संख्या में बसें खड़ी रहीं, जबकि 10 हजार से ज्यादा ड्राइवर ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। ड्राइवरों की गैरमौजूदगी के चलते DTC की 6,840 सरकारी बसों में से ज्यादातर सड़कों पर नहीं उतर सकीं। इससे दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई।
तन बढ़ाने की मांग पर नहीं बनी बात
हड़ताल कर रहे DTC ड्राइवर सेवा शर्तों में सुधार की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में रोजाना कम से कम 2,000 रुपये मजदूरी, सालाना बोनस, सरकारी छुट्टियों में काम करने का भुगतान और मेडिकल इंश्योरेंस शामिल हैं। परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने गुरुवार को कहा कि वेतन बढ़ाने की मांग को छोड़कर ड्राइवरों की बाकी सभी मांगें मान ली गई हैं। हालांकि, वेतन को लेकर अब तक सहमति नहीं बन पाई है।
ड्राइवरों की मांग पर की गई चर्चा
परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि गुरुवार को हड़ताल कर रहे DTC ड्राइवरों से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की गई। उन्होंने मेडिकल सुविधाओं, छुट्टी, अतिरिक्त किलोमीटर के भुगतान और मौत की स्थिति में परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने जैसी मांगों पर सहमति का दावा किया। मंत्री ने कहा कि लेबर विभाग से सलाह के बाद वेतन बढ़ाने की भी व्यवस्था की जाएगी। हालांकि, डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी ने कहा कि बातचीत में कोई मांग पूरी नहीं हुई और शुक्रवार को भी हड़ताल जारी रहेगी।
150 बसें खड़ी, ड्राइवरों ने डिपो के बाहर डाला डेरा
वजीरपुर डिपो में करीब 150 DTC बसें खड़ी रहीं, जबकि ड्राइवर बाहर गद्दे बिछाकर बैठे नजर आए। इनमें 36 वर्षीय जोगिंदर सिंह भी शामिल थे, जो पिछले तीन साल से DTC बस चला रहे हैं। वह रोज झज्जर से दिल्ली काम पर आते हैं और आने-जाने में करीब 80 रुपये खर्च होते हैं। सिंह ने बताया कि दो बच्चों की 2,500 से 3,000 रुपये मासिक स्कूल फीस और रोज का सफर मिलाकर घर का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि वह रोज करीब 105 किलोमीटर बस चलाते हैं और वजीरपुर-नंद नगरी के बीच तीन चक्कर लगाते हैं। इसके बावजूद महीने के अंत तक हाथ में कुछ नहीं बचता। फिलहाल वह बाइक की EMI भरने के लिए दोस्तों से मदद मांग रहे हैं।
