DUSU Election Delhi High Court: दिल्ली विश्ववि द्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगा। याचिका में चुनाव प्रक्रिया के दौरान लिंगदोह समिति की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने सोमवार को मामले की सुनवाई बुधवार के लिए तय की।
उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग वाले नोटिस को चुनौती
मामले को सोमवार को तत्काल सुनवाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट के सामने रखा गया। याचिकाकर्ता की ओर से वकील ने सोमवार को ही सुनवाई की मांग की, लेकिन मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि मामले की सुनवाई बुधवार को होगी। याचिकाकर्ता विजेता ने 11 सितंबर को जारी उस नोटिस को रद्द करने की मांग की है, जिसमें DUSU के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। इसके अलावा 13 अगस्त को जारी चुनाव अधिसूचना को भी चुनौती दी गई है।
राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप पर रोक की मांग
याचिकाकर्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय को DUSU संविधान, सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर 2006 के फैसले और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के मुताबिक चुनाव कराने का निर्देश देने की मांग की है। याचिका में DUSU और विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के छात्र चुनावों में राजनीतिक दलों के किसी भी तरह के हस्तक्षेप पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग भी की गई है। इसके लिए याचिकाकर्ता ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों के क्लॉज 6.3 का हवाला दिया है, जिसमें छात्र चुनाव और छात्र प्रतिनिधित्व को राजनीतिक दलों से अलग रखने की बात कही गई है।
राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों पर उठे सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि DUSU चुनाव के लिए NSUI, AISA-SFI, ASAP और ABVP जैसे राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों ने पैनल जारी किए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसे छात्र संगठनों की भागीदारी सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय सुरक्षा उपायों के खिलाफ है। याचिका में 13 अगस्त की चुनाव अधिसूचना और 11 सितंबर के नोटिस पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की गई है। दलील दी गई है कि प्रचार, मतदान, मतगणना और नतीजे जारी होने की प्रक्रिया आगे बढ़ने से ऐसी स्थिति बन सकती है, जिसे बाद में बदलना मुश्किल होगा।
18 सितंबर को मतदान, 19 सितंबर को होगी मतगणना
दिल्ली विश्वविद्यालय ने DUSU चुनाव 2026 का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसके मुताबिक, मतदान 18 सितंबर को और मतगणना 19 सितंबर को होगी। ऐसे में मतदान से महज दो दिन पहले चुनाव प्रक्रिया पर रोक की मांग वाली याचिका पर हाई कोर्ट की सुनवाई अहम हो गई है।
DUSU संविधान की धाराओं पर भी सवाल
याचिका में DUSU संविधान की धारा 6(i) और 6(ii) को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि ये प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के 2006 के फैसले और लिंगदोह समिति की व्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं। याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत जनहित याचिका के रूप में हाई कोर्ट का रुख किया है। याचिका में निष्पक्ष, पारदर्शी और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त छात्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक दखल की मांग की गई है।

