Etawah: इटावा के सैफई से रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। 55 वर्षीय रेखा देवी की मौत के बाद उनके पति, तीन बेटों और मायके वालों ने शव लेने से इनकार कर दिया। ऐसे में NGO 'रक्तदाता समूह' ने आगे बढ़कर पुलिस की मौजूदगी में यमुना तट पर पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया।
21 अगस्त को अस्पताल में भर्ती हुई थीं
औरैया जिला अस्पताल से एंबुलेंस कर्मियों ने 21 अगस्त 2026 को गंभीर हालत में रेखा देवी को सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में भर्ती कराया था। 7 सितंबर की दोपहर उनकी मौत हो गई। सैफई पुलिस ने पति शिवनाथ, निवासी कनमऊ गांव, औरैया से संपर्क किया, लेकिन वह नहीं पहुंचे। पति और तीनों बेटों ने शव लेने से साफ मना कर दिया। परिवार का आरोप था कि रेखा करीब 15 साल पहले गांव के संजू यादव के साथ घर छोड़कर चली गई थीं। संजू की मौत के बाद वह कहां रहीं, परिवार को जानकारी नहीं थी। इसी पुराने विवाद के चलते परिवार ने उनसे रिश्ता तोड़ लिया था।
मायके वालों ने भी ठुकराया शव
इसके बाद संस्था ने जालौन के कुठौंद थाना क्षेत्र के बड़ी मड़ैया गांव में रह रहे रेखा के पिता महादेव और भाई से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने भी शव लेने से इनकार कर दिया। 10 सितंबर को पुलिस ने पंचायतनामा कर शव 72 घंटे के लिए मोर्चरी में रखवाया।
दिबियापुर पुलिस घर पहुंची तो पति ताला लगाकर फरार था और बेटों ने फोन बंद कर लिए थे। अंतिम संस्कार के दौरान संस्था के संचालक शरद तिवारी ने वीडियो कॉल के जरिए परिवार को जोड़ने की कोशिश की। बड़ी बहू से अंतिम दर्शन की अपील की गई, लेकिन उन्होंने शव देखने से भी इनकार कर दिया। इसके बाद शरद तिवारी और संस्था के सदस्यों ने विधि-विधान से रेखा देवी का अंतिम संस्कार कर दिया।
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