Ghulam Nabi Azad Election Commission: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अनंतनाग में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से चुनावों को लेकर आयोग पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के पास अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत नहीं थे। आजाद के मुताबिक, इस बार स्थिति अलग है, क्योंकि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने कई मामलों में अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR समेत उसके सभी फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए थे।
2 चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर आजाद ने उठाया मुद्दा
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि इस बार मामला इसलिए अलग है क्योंकि दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने कई बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उनके मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने यह जानने की कोशिश की कि कहीं चुनाव प्रक्रिया में कुछ गलत तो नहीं हो रहा और अपनी चिंताओं से मुख्य चुनाव आयुक्त को अवगत कराया। आजाद का आरोप है कि इन आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया गया और फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त की इच्छा के अनुसार लिए गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR समेत उसके सभी फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
‘विपक्ष की मांग गलत नहीं’, आजाद ने जांच की जरूरत बताई
डीपीएपी अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मौजूदा विवाद के बीच विपक्ष की ओर से दोबारा चुनाव कराने की मांग को पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता। उनके मुताबिक, अगर तीन में से दो चुनाव आयुक्त किसी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, तो उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और मामले की जांच होनी चाहिए। आजाद ने इसी आधार पर विपक्ष की मांग को खारिज नहीं करने की बात कही। वहीं, चुनाव आयोग ने इन दावों पर कहा है कि आयुक्तों की ओर से दिए गए सवाल, सुझाव और अलग-अलग राय निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा थे। आयोग के मुताबिक, बहु-सदस्यीय संस्था में इस तरह का विचार-विमर्श सामान्य है और SIR समेत उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
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