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मां को भनक तक नहीं लगी, जापान पहुंचीं सीमा… फिर ट्रैक पर रच दिया इतिहास

by | Sep 25, 2026 | Cover Story Latest

Seema Asian Games Bronze: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के छोटे से गांव से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचीं धाविका सीमा की कहानी संघर्ष और जज्बे से भरी है। 25 साल की सीमा ने महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में 32:50.05 के समय के साथ कांस्य पदक जीता। खास बात यह है कि उन्होंने जापान जाने की जानकारी अपनी 78 वर्षीय मां तक को नहीं दी थी।

मां की चिंता के कारण छिपाई बात

सीमा के पिता का निधन तब हो गया था, जब वह महज 12 साल की थीं। उनकी मां की उम्र अब करीब 78 साल है और सीमा के मुताबिक वह बेटी के बाहर जाने को लेकर काफी चिंतित रहती हैं। इसी वजह से सीमा ने उन्हें बताया ही नहीं कि वह एशियन गेम्स के लिए जापान जा रही हैं। सीमा ने बताया कि मां को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी है। इसलिए वह बाहर जाने से जुड़ी ज्यादा जानकारी उन्हें नहीं देतीं। परिवार में सिर्फ उनकी बड़ी बहन को जापान जाने की पूरी जानकारी थी।

नंगे पैर दौड़ने से एशियन गेम्स तक

सीमा का बचपन भी आसान नहीं रहा। चंबा के रेटा गांव में रहने वाली सीमा बचपन में नंगे पैर दौड़ती थीं और मवेशी चराती थीं। एथलेटिक्स को करियर बनाने के फैसले पर गांव में सवाल भी उठे, लेकिन उनकी मां ने हमेशा उनका साथ दिया। आज उसी मेहनत का नतीजा है कि सीमा ने एशियन गेम्स में 10,000 मीटर में कांस्य पदक जीत लिया। वह इस स्पर्धा में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला बनी हैं। उनसे पहले 2010 एशियन गेम्स में प्रीजा श्रीधरन ने स्वर्ण और कविता राउत ने रजत पदक जीता था।

गोल्ड का सपना, कांस्य से भी खुश

सीमा ने बताया कि वह एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के इरादे से उतरी थीं। उनके मुताबिक 10,000 मीटर की रेस काफी रणनीतिक थी और सभी धावकों का लक्ष्य पदक जीतना था। हालांकि उन्हें कांस्य मिला, लेकिन वह इससे खुश हैं।

28 सितंबर को फिर उतरेंगी ट्रैक पर

सीमा अब 28 सितंबर को महिलाओं की 5000 मीटर स्पर्धा में हिस्सा लेंगी। 10,000 मीटर में कांस्य जीतने के बाद उनका लक्ष्य अब पदक का रंग बदलना है। सीमा ने कहा कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगी। पिछले साल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में रजत पदक जीत चुकीं सीमा अपनी तैयारी का श्रेय कोच स्कॉट साइमन को भी देती हैं। उनके मुताबिक ओलंपिक चैंपियनों के साथ ट्रेनिंग से उनके प्रदर्शन के साथ मानसिक मजबूती भी बढ़ी है।

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