Thursday, Sep 24

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रूस-यूएस से आगे निकला भारत, बना यूरोप का बड़ा डीजल सप्लायर, 60% आपूर्ति भारतीय रिफाइनरों से

India Diesel Supply to Europe: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण वैश्विक तेल-गैस सप्लाई प्रभावित हुई, लेकिन भारत पर इसका असर सीमित रहा। आयात स्रोतों में विविधता, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और अन्य कदमों के चलते अब भारत दूसरे देशों को ईंधन सप्लाई करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। Vortexa के आंकड़ों के अनुसार, रूसी निर्यात में कमजोरी और अमेरिकी शिपमेंट घटने के बीच भारत यूरोप का प्रमुख डीजल सप्लायर बनकर उभरा है।

अगस्त में 60% डीजल भारत से

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से यूरोप जाने वाले जहाजों में पहुंचे डीजल का करीब 60% भारतीय रिफाइनरों से आया। इस रूट से लगभग 2 लाख बैरल प्रतिदिन डीजल या गैसोल की आवाजाही हुई। मार्च-अप्रैल में लगभग ठप रहे इस मार्ग का प्रवाह अब पिछले साल के स्तर के करीब पहुंच गया है।

भारत दुनिया का चौथा बड़ा रिफाइनर

भारत की अतिरिक्त रिफाइनिंग क्षमता इसकी बढ़ती भूमिका की बड़ी वजह है। देश की स्थापित क्षमता 258.1 मिलियन टन सालाना है, जो घरेलू मांग से अधिक है। 2025-26 में भारत ने 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात किए।

रूस की सप्लाई में बड़ी गिरावट

अगस्त में अमेरिका और रूस से यूरोप की डीजल सप्लाई घटी। Vortexa के अनुसार, अगस्त के पहले 25 दिनों में रूस का समुद्री डीजल-गैसोल निर्यात सिर्फ 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो सालाना आधार पर करीब 6.1 लाख बैरल प्रतिदिन कम है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेनी ड्रोन हमलों से रूसी रिफाइनरियों और निर्यात ढांचे पर असर पड़ा। जुलाई-अगस्त में करीब 32 हमले हुए। 2.6 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली पर्म रिफाइनरी पर हमले के बाद इसकी करीब 28% क्षमता ही चालू रह गई। निर्यात टर्मिनल भी प्रभावित हुए हैं।

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