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करोड़ों में बिके लेकिन नहीं मिला मौका, IPL 2026 में बेंच पर बैठे रहे बड़े खिलाड़ी

by | May 27, 2026 | क्रिकेट

IPL करोड़पति बनाती है। खेलने की गारंटी नहीं देती।

यह एक बड़ा भ्रम है कि नीलामी में बड़ी रक़म मिलने से टीम में बड़ी भूमिका भी पक्की हो जाती है। लेकिन हक़ीक़त में फ़्रेंचाइज़ी क्रिकेट बेहद बेरहम हो सकता है। टीमें करोड़ों रुपये सिर्फ़ तत्काल प्रयाेग, प्रभाव या परिणाम के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की योजनाओं के लिए भी ख़र्च करती हैं। नतीजा यह कि कई स्थापित और महंगे क्रिकेटर पूरा IPL 2026 सीज़न डगआउट में बैठकर देखते रह गए। उनमें से एक तो कभी भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी उम्मीद हुआ करता था।

तनख़्वाह मिलती रहे पर काम न मिले, यह किसी के लिए भी तकलीफ़देह होता है। लेकिन एक एथलीट के लिए यह दोगुना कठिन है। उसका करियर गिनती के कुछ सीज़न का होता है। हर बैठा हुआ मैच वापस नहीं आता।

पृथ्वी शॉ (दिल्ली कैपिटल्स) ₹75 लाख

एक समय था जब पृथ्वी शॉ भारतीय क्रिकेट का भविष्य माने जाते थे। अंडर-19 वर्ल्ड कप विजेता कप्तान, टेस्ट डेब्यू पर ही शतक जड़ने वाले बल्लेबाज़ और आईपीएल के सबसे निडर युवा ओपनरों में से एक।

आज उनके करियर की कहानी बिल्कुल अलग दिखती है। 79 आईपीएल मैच और 14 अर्धशतकों के प्रभावशाली रिकॉर्ड के बावजूद, पृथ्वी शॉ IPL 2025 के ऑक्शन में अनसोल्ड रहे, जो एक चौंकाने वाला पतन था। दिल्ली कैपिटल्स ने 2026 में उन्हें ₹75 लाख में वापस खरीदा और एक भावुक वीडियो जारी कर कहा, "Our boy is back home" लेकिन शॉ न केवल प्लेइंग XI में जगह नहीं बना पाए, बल्कि कई बार तो वह मैच-डे बेंच (अंतिम 15) का हिस्सा भी नहीं थे। दिल्ली ने घर वापसी का जश्न तो शानदार मनाया, बस उन्हें मैदान पर उतरने की जगह देना भूल गई।

और शॉ इस मामले में अकेले नहीं थे।

मंगेश यादव (RCB) ₹5.20 करोड़

अगर शॉ की कहानी फ़ॉर्म में गिरावट की थी, तो मंगेश यादव की कहानी उन सपनों की थी जो शुरू होने से पहले ही ठहर गए।

मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव के एक ट्रक ड्राइवर के बेटे। फिर आया 2025 का 'एमपी प्रीमियर लीग', जहां उन्होंने मात्र 6 मैचों में 14 विकेट झटके। इसके बाद RCB ने मिनी-ऑक्शन में ₹30 लाख के बेस प्राइस वाले इस खिलाड़ी पर सीधे ₹5.20 करोड़ खर्च कर दिए। सीधे 1,633% की अविश्वसनीय छलांग!

फिर भी, यह बड़ा सपना डगआउट तक ही सीमित रह गया। भुवनेश्वर कुमार, जॉश हेज़लवुड, रसिख सलाम और रोमारियो शेफ़र्ड जैसे स्थापित गेंदबाज़ों की मौजूदगी के कारण, ख़िताब की दौड़ में लगी टीम के पास नए प्रयोगों की कोई गुंजाइश नहीं थी। मंगेश बिना आईपीएल डेब्यू किए ही सीज़न खत्म कर गए। वह अब भी अपनी पहली गेंद, पहले विकेट और अपनी पहली कैप का इंतज़ार कर रहे हैं।

ईशांत शर्मा (गुजरात टाइटंस) ₹75 लाख

आईपीएल में 117 मैचों का लंबा और समृद्ध अनुभव। उन्हें उनके बेस प्राइस पर खरीदा गया था। लेकिन गुजरात की पेस यूनिट पहले से ही अंतरराष्ट्रीय सितारों से भरी हुई थी…मोहम्मद सिराज, कगिसो रबाडा और प्रसिद्ध कृष्णा। जब आपके पास तीन फ्रंटलाइन विकल्प मौजूद हों, तो चौथे के लिए जगह बनाना नामुमकिन हो जाता है। ईशांत पूरा सीज़न सिर्फ बेंच पर ही बैठे नज़र आए।

जयंत यादव (गुजरात टाइटंस) ₹75 लाख

साल 2023 में अनसोल्ड रहे। साल 2024 में भी अनसोल्ड रहे। आख़िरकार 2026 में जाकर उन्हें खरीदार मिला। लेकिन राशिद खान, मानव सुथार और साई किशोर के रहते हुए स्पिन विभाग में उनके लिए एक भी मैच खेलने का मौका नहीं आया। आईपीएल में वापसी का यह रास्ता उनके लिए कहीं आगे नहीं बढ़ सका।

राहुल त्रिपाठी (KKR) ₹75 लाख

100 से ज़्यादा आईपीएल मैचों का अनुभव। लंबे समय तक जिन्हें इस लीग के सबसे सक्रिय और आक्रामक भारतीय बल्लेबाज़ों में गिना जाता रहा। इसके बावजूद वह KKR की प्लेइंग XI में अपनी जगह नहीं बना सके। अंगकृष रघुवंशी और फिल सॉल्ट ने अपने शानदार प्रदर्शन से अपनी जगह बनाए रखी, जिसके चलते त्रिपाठी को पूरा सीज़न बाहर बैठकर ही मैच देखना पड़ा।

आईपीएल की सबसे कठिन लड़ाई हमेशा मैदान पर नहीं होती। आईपीएल में सबसे मुश्किल प्रतिस्पर्धा अक्सर विरोधी टीम के ख़िलाफ़ नहीं होती। वह आपके अपने ही ड्रेसिंग रूम के भीतर होती है।

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