Friday, Sep 25

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“ये लोकतंत्र है या प्रताड़ना?” SIR पर ममता बनर्जी का चुनाव आयोग को तीखा पत्र, गंभीर आरोपों से मचा सियासी भूचाल

Mamata Banerjee ECI letter: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सीधा और तीखा हमला बोला है। उन्होंने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक विस्तृत पत्र लिखते हुए आरोप लगाया कि SIR के नाम पर आम नागरिकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया संवेदनशीलता से पूरी तरह खाली हो चुकी है।

क्या लिखा है पत्र में?

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि उन्हें यह देखकर गहरा आघात और चिंता हुई है कि निर्वाचन आयोग की सुनवाई और सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी और यांत्रिक बन गई है। इसमें न तो मानवीय दृष्टिकोण है और न ही सामाजिक समझ। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र और संविधान की बुनियाद से जुड़ी है, फिर भी इसमें इंसानियत का अभाव साफ दिखाई देता है। ममता बनर्जी ने दावा किया कि अब तक SIR प्रक्रिया से जुड़ी परेशानियों के कारण 77 लोगों की मौत, 4 आत्महत्या के प्रयास और 17 लोगों के बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होने की खबरें सामने आई हैं। उनके मुताबिक डर, धमकी और बिना तैयारी के काम का अत्यधिक दबाव इन घटनाओं की बड़ी वजह है।

कई चौंकाने वाले उदाहरण

पत्र में मुख्यमंत्री ने कई चौंकाने वाले उदाहरण भी गिनाए। उन्होंने कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता और 90 वर्ष से अधिक उम्र के विद्वान प्रोफेसर अमर्त्य सेन से भी अपनी पहचान साबित करने को कहा गया। इसी तरह कवि जॉय गोस्वामी, सांसद व अभिनेता दीपक अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी और भारत सेवाश्रम संघ के महाराज जैसे प्रतिष्ठित लोगों को भी इस कथित असंवेदनशील प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

महिलाओं और असली मतदाताओं का अपमान

महिलाओं को लेकर भी ममता बनर्जी ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शादी के बाद ससुराल जाकर उपनाम बदलने वाली महिला मतदाताओं को बार-बार पहचान साबित करने के लिए बुलाया जा रहा है। यह न केवल सामाजिक संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है, बल्कि महिलाओं और असली मतदाताओं का अपमान भी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या एक संवैधानिक संस्था देश की आधी आबादी के साथ ऐसा व्यवहार कर सकती है?

ऑब्ज़र्वर और माइक्रो-ऑब्ज़र्वर पर उठे कई सवाल

मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त ऑब्ज़र्वर और माइक्रो-ऑब्ज़र्वर पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा कि बिना किसी उचित प्रशिक्षण के इन अधिकारियों को अत्यंत संवेदनशील कार्यों में लगाया जा रहा है। कई ऑब्ज़र्वर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहे हैं और कुछ मामलों में आम नागरिकों को देशद्रोही तक कहा जा रहा है, साथ ही उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया जा रहा है।

ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग राज्य सरकार से इन तथाकथित ऑब्ज़र्वर को सुरक्षा देने की उम्मीद कर रहा है, जबकि इस समय पुलिस पहले से ही गंगासागर मेले में भारी संख्या में तैनात है। उन्होंने कहा कि पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य आम नागरिकों की सुरक्षा है, न कि ऐसे ऑब्ज़र्वर की।

SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग

पत्र के अंत में मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों को जानबूझकर राजनीतिक पक्षपात के तहत निशाना बनाया जा रहा है और तथाकथित “लॉजिकल गड़बड़ियों” के नाम पर असल में “इलॉजिकल” कार्रवाइयां की जा रही हैं। ममता बनर्जी का यह पत्र सामने आने के बाद SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सियासी हलकों में तीखी बहस शुरू हो गई है।

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