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जम्मू-कश्मीर में किताबों पर क्यों लगा बैन? विधानसभा से लेकर हाई कोर्ट तक छिड़ी महाजंग, जानिए कारण

by | Sep 25, 2026 | Trending

Jammu Kashmir Books Ban: जम्मू-कश्मीर में सरकारी लाइब्रेरी से हजारों किताबें हटाए जाने का मामला अब विधानसभा से लेकर हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। करीब 21.81 लाख किताबों और अन्य प्रकाशनों की जांच के बाद 4,249 किताबों को सर्कुलेशन से हटाया गया। इसके अलावा 518 प्रतियां ऐसी किताबों की थीं, जिनके 19 शीर्षकों पर पहले से रोक लगी हुई थी।

21 लाख से ज्यादा किताबों की जांच

विधानसभा में शिक्षा विभाग की ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में कुल 21,81,582 किताबों और अन्य प्रकाशनों की जांच की गई। इनमें कश्मीर डिवीजन की 12,48,641 और जम्मू डिवीजन की 9,32,941 किताबें शामिल थीं। समीक्षा के दौरान 4,249 किताबों में आपत्तिजनक सामग्री मिलने की बात कही गई।

उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि किताबों पर रोक लगनी चाहिए या नहीं, इस पर उनकी अपनी राय हो सकती है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में चुनी हुई सरकार के पास ऐसे फैसले लेने का अधिकार नहीं है। उनके बयान के बाद विपक्ष ने सरकार की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं।

सरकार ने बनाई समीक्षा कमेटी

शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने विधानसभा में बताया कि किताबों की जांच के लिए सरकार ने कमेटी बनाई थी। सरकार का कहना है कि समीक्षा का उद्देश्य ऐसी सामग्री की पहचान करना है, जिसे लाइब्रेरी में रखना उचित नहीं माना गया। AIP विधायक शेख खुर्शीद ने कहा कि उन्होंने हटाई गई किताबों के नाम, लेखकों और प्रकाशकों की जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें पूरी जानकारी नहीं मिली। PDP विधायक आगा सैयद मुंतज़िर ने भी सरकार से इस मुद्दे पर विधानसभा में स्पष्ट चर्चा की मांग की।

हाई कोर्ट पहुंचा मामला

किताबों को हटाने और कुछ पुस्तकों पर रोक लगाने के खिलाफ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक सवालों से जोड़ते हुए अदालत से इसकी समीक्षा की मांग की है।

BJP ने कार्रवाई का किया बचाव

बीजेपी ने किताबों को हटाने की कार्रवाई का बचाव किया है। विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि जिन एजेंसियों ने किताबों पर रोक लगाई है, उन्होंने किसी कारण से ही ऐसा किया होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री के अधिकारों को लेकर दिए गए बयान पर भी सवाल उठाए। फिलहाल यह मामला विधानसभा और हाई कोर्ट, दोनों जगह चर्चा में है। एक तरफ किताबों की समीक्षा और उन्हें लाइब्रेरी से हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रतिबंधित पुस्तकों को लेकर कानूनी चुनौती जारी है। हाई कोर्ट के अंतिम फैसले पर अब नजर बनी हुई है।

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