Jammu Kashmir Security: जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति को लेकर रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में कई अहम आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में केंद्र शासित प्रदेश में पत्थरबाजी की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई। इसी दौरान स्थानीय युवाओं के आतंकी संगठनों में शामिल होने के मामले भी घटकर सिर्फ एक रह गए। रिपोर्ट में सुरक्षा बलों के अभियानों, सुरक्षा व्यवस्था और सरकार की विभिन्न योजनाओं को जम्मू-कश्मीर में माहौल में आए बदलाव से जोड़ा गया है। हालांकि, रिपोर्ट ने क्षेत्र की स्थिति को अभी भी अप्रत्याशित बताया है।
स्थानीय आतंकी भर्ती में बड़ी गिरावट
स्थानीय युवाओं के आतंकी संगठनों में शामिल होने के आंकड़ों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। 2021 में 146 स्थानीय युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए थे। 2022 में यह संख्या 121, 2023 में 19 और 2024 में 4 रह गई। 2025 में यह आंकड़ा सिर्फ 1 रहा।
पत्थरबाजी की घटनाएं शून्य
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की कोई घटना दर्ज नहीं हुई। पिछले कुछ वर्षों में भी ऐसी घटनाओं में लगातार कमी आई है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और सरकारी योजनाओं के साथ स्थानीय स्तर पर सहयोग ने सुरक्षा स्थिति में सुधार में भूमिका निभाई है।
LoC पर 163 संघर्षविराम उल्लंघन
हालांकि, LoC पर स्थिति पूरी तरह शांत नहीं रही। वर्ष 2025 में संघर्षविराम उल्लंघन के 163 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2024 में ऐसे सिर्फ 2 मामले सामने आए थे। इन 163 मामलों में से 124 ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दर्ज हुए। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में कोई और 2022 में एक संघर्षविराम उल्लंघन दर्ज हुआ था।
घुसपैठ की 6 कोशिशें नाकाम
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में LoC के रास्ते घुसपैठ की 6 कोशिशें हुईं। सुरक्षा बलों ने इन सभी को नाकाम किया और 12 पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया। इससे पहले 2021 में 8, 2022 में 12, 2023 में 18 और 2024 में 10 घुसपैठ की कोशिशें दर्ज की गई थीं।
2025 में 19 आतंकी मारे गए
जम्मू-कश्मीर के अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा बलों के आतंकवाद विरोधी अभियान भी जारी रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में 19 आतंकियों को मार गिराया गया, जिनमें 8 पाकिस्तानी नागरिक थे।
2.3 करोड़ पर्यटक पहुंचे
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में पर्यटन गतिविधियों का भी जिक्र है। 2025 में करीब 2.3 करोड़ पर्यटकों के जम्मू-कश्मीर पहुंचने की बात कही गई है। इनमें लगभग 4.13 लाख श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा में शामिल हुए। कुल मिलाकर, रिपोर्ट के आंकड़ों में पत्थरबाजी और स्थानीय आतंकी भर्ती में बड़ी गिरावट दिखाई देती है। वहीं, LoC पर संघर्षविराम उल्लंघन और सीमा पार से होने वाली गतिविधियां अब भी सुरक्षा के लिहाज से चुनौती बनी हुई हैं।
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