Kashmiri Pandit Employees: कश्मीर घाटी में आतंकी संगठनों की नई धमकियों और निजी डेटा लीक होने के बाद कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में दहशत का माहौल है। सुरक्षित सरकारी ट्रांजिट आवास की मांग को लेकर पीएम पैकेज के तहत काम कर रहे कर्मचारियों ने श्रीनगर की प्रेस कॉलोनी में मौन प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने प्रशासन को 30 सितंबर तक की मोहलत देते हुए कहा है कि अगर तब तक उन्हें सुरक्षित आवास नहीं मिला, तो 1 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। घाटी में करीब 6,000 से 7,000 कर्मचारी पीएम पैकेज के तहत काम कर रहे हैं। इनमें कई कर्मचारी 10 साल से भी ज्यादा समय से वहां तैनात हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले एक महीने से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। ऐसे में किराए के असुरक्षित मकानों में रहना उनके लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है।
तैयार फ्लैट्स का आवंटन नहीं होने से नाराजगी
कर्मचारियों के मुताबिक, श्रीनगर के जेवान, अनंतनाग के मट्टन और वेरीनाग समेत कई इलाकों में हजारों ट्रांजिट फ्लैट्स बनकर तैयार हैं, लेकिन उनका आवंटन अब तक अटका हुआ है। कर्मचारियों ने इन कॉलोनियों के सुरक्षा ऑडिट और तय समय पर पजेशन देने की मांग बार-बार उठाई है। प्रेस कॉलोनी में प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी प्रतिनिधियों ने बताया कि करीब 3,500 कर्मचारी अब भी किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि इन निजी मकानों में पर्याप्त सुरक्षा नहीं है, जिससे उनकी जान को खतरा बना हुआ है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कई सरकारी ट्रांजिट आवास पूरी तरह तैयार होने के बावजूद उन्हें चाबियां नहीं सौंपी जा रही हैं।
16 साल से सुरक्षित आवास का इंतजार
कश्मीरी पंडित कर्मचारी आशीष राजदान ने कहा कि उनकी मुख्य मांग कई वर्षों से वही है, उन्हें सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने बताया कि वे 2010 से घाटी में हैं और 16 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें सुरक्षित आवास नहीं मिला है। आशीष राजदान के मुताबिक, प्रशासन की ओर से उन्हें लगातार अलग-अलग समय-सीमाएं दी गईं। पहले अप्रैल, फिर मई, जून, जुलाई और अगस्त के बाद अब सितंबर के अंत तक की समय-सीमा दी गई है। उन्होंने कहा कि 39 इमारतों में से 26 रहने के लिए तैयार हैं। ऐसे में तैयार इमारतों में कर्मचारियों को तुरंत भेजा जा सकता है और बाकी इमारतों का निर्माण साथ-साथ जारी रखा जा सकता है। उन्होंने साफ कहा कि 30 सितंबर उनकी अंतिम समय-सीमा है। अगर तब तक मांग पूरी नहीं हुई, तो वे भूख हड़ताल के लिए मजबूर होंगे।
धमकी भरे पत्रों से बढ़ा मानसिक तनाव
कश्मीरी पंडित कर्मचारी बरखा ने कहा कि वे लंबे समय से ट्रांजिट कैंपों में रहने की जगह का इंतजार कर रहे हैं। उनके मुताबिक, सरकार लगातार सुरक्षित आवास देने का भरोसा देती रही, लेकिन अब तक इंतजार खत्म नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि नए धमकी भरे पत्र सामने आने के बाद कर्मचारियों की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि जो इमारतें पहले से तैयार हैं, उन्हें खोलकर कर्मचारियों को तुरंत वहां शिफ्ट किया जाना चाहिए। इससे सरकार के लिए उन्हें उचित सुरक्षा देना भी आसान होगा।
धमकियों और डेटा लीक से बढ़ी चिंता
कर्मचारियों का यह प्रदर्शन आतंकी संगठनों की नई धमकियों के बीच हुआ है। हाल के दिनों में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ (ULC) की ओर से पत्र जारी किए जाने की बात सामने आई है। इसमें कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को ‘नौकरी छोड़ो या मौत चुनो’ की धमकी दिए जाने का आरोप है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनके फोन नंबर, पते और गाड़ियों के नंबर भी ऑनलाइन लीक किए गए हैं। बताया गया है कि यह निजी डेटा सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर फैलाया गया।
बीजेपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने किया समर्थन
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षित आवास की मांग को बीजेपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी जायज बताया है। दोनों दलों ने सरकार से कर्मचारियों को जल्द सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की अपील की है। बीजेपी का कहना है कि एक तरफ सरकार कश्मीरी पंडितों को घाटी में वापस बसाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। ऐसे में सुरक्षित आवास की उनकी मांग उचित है। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय (MHA) से इस मामले को प्राथमिकता देते हुए तत्काल ठोस कदम उठाने की अपील की है।
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