बिहार में शराब तस्करी के आरोप में गिरफ्तार नेहा झा का मामला सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। आरोप है कि ट्रेन में सफर के दौरान उसके पास से शराब की बोतलें बरामद हुईं। गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भेज दिया गया। अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल उसकी जमानत को लेकर है।
पटना के अधिवक्ता शिवनंदन भारती ने सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में जमानत की संभावनाओं और इस तरह के मामलों में सामने आने वाले कानूनी पहलुओं पर बात की है। उनके मुताबिक, अगर अभियोजन यह साबित नहीं कर पाता कि जिस बैग से शराब बरामद हुई, वह नेहा का ही था, तो यह जमानत की सुनवाई में बचाव पक्ष के लिए अहम मुद्दा बन सकता है।
हालांकि, नेहा को जमानत मिलेगी या नहीं, इसका अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।
सोशल मीडिया पर क्यों चर्चा में आया मामला?
अधिवक्ता शिवनंदन भारती के मुताबिक, बिहार में शराब से जुड़े मामले सामने आते रहते हैं। लेकिन नेहा झा के मामले को सोशल मीडिया पर अलग तरह से ज्यादा चर्चा मिली।
वकील का कहना है कि आरोपी लड़की की तस्वीरें और उसकी खूबसूरती को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बातें हुईं। कुछ लोगों ने उसे ट्रोल किया, जबकि कुछ उसके समर्थन में सामने आए। इसी वजह से मामला और ज्यादा वायरल होता गया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर हुई जातिगत टिप्पणियों का भी जिक्र किया। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप या उसकी संलिप्तता केवल सोशल मीडिया चर्चाओं से साबित नहीं होती।
जमानत में सबसे अहम हो सकता है बैग का मालिकाना हक
वकील के मुताबिक, इस मामले में बचाव पक्ष एक अहम सवाल उठा सकता है कि जिस बैग से शराब मिली, वह वास्तव में नेहा का था या नहीं।
शराब ट्रेन में सीट के नीचे रखे बैग से बरामद होने की बात कही जा रही है। ऐसे में यह साबित करना महत्वपूर्ण हो सकता है कि वह बैग आरोपी का ही था।
यदि जांच में पुलिस के पास बैग को नेहा से जोड़ने के पर्याप्त सबूत हैं, तो मामला अलग हो सकता है। लेकिन केवल सीट के नीचे बैग मिलने से उसके मालिक की पहचान को लेकर सवाल उठाया जा सकता है।
ट्रेन में बैग की पहचान साबित करना क्यों जरूरी?
अधिवक्ता ने इस स्थिति को एयरपोर्ट पर सामान की व्यवस्था से जोड़कर समझाया। एयरपोर्ट पर सामान की पहचान के लिए टैग और दूसरी व्यवस्थाएं होती हैं।
ट्रेन में सीट के नीचे रखे सामान पर आम तौर पर यात्री का नाम दर्ज नहीं होता। ऐसे में बचाव पक्ष यह तर्क दे सकता है कि सीट के नीचे मिला बैग अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह उसी यात्री का है।
हालांकि, CCTV फुटेज, गवाहों के बयान या दूसरे साक्ष्यों से अगर बैग को नेहा से जोड़ दिया जाता है, तो अभियोजन का पक्ष मजबूत हो सकता है।
CCTV फुटेज से बदल सकती है जांच की दिशा
अगर CCTV में यह दिखाई देता है कि नेहा उसी बैग के साथ ट्रेन में आई थी या बैग उसके कब्जे में था, तो यह जांच के लिए महत्वपूर्ण सबूत हो सकता है।
वकील के अनुसार, जमानत के स्तर पर अदालत प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री और आरोपों पर विचार करती है। सबूतों की विस्तृत जांच और उनकी अंतिम विश्वसनीयता का फैसला ट्रायल के दौरान किया जा सकता है।
शराब की मात्रा ज्यादा हुई तो बेल आसान नहीं
शराब की बरामदगी की मात्रा को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने की बात कही गई है। अधिवक्ता के मुताबिक, यदि बरामद शराब की मात्रा 30 लीटर से अधिक है, तो निचली अदालत से तुरंत जमानत मिलना मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला होना और पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना जैसे पहलू जमानत की सुनवाई में ध्यान में रखे जा सकते हैं।
अगर निचली अदालत से राहत नहीं मिलती है, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट का रुख किया जा सकता है।
डेढ़ महीने में बाहर आने का अनुमान, लेकिन तारीख तय नहीं
अधिवक्ता शिवनंदन भारती ने अनुमान जताया कि जमानत की प्रक्रिया में करीब डेढ़ महीने तक का समय लग सकता है। हालांकि, अगर निचली अदालत शुरुआती सुनवाई में ही जमानत दे देती है, तो इससे कम समय में भी जेल से बाहर आने की स्थिति बन सकती है।
इसलिए अभी यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है कि नेहा झा किस तारीख को जेल से बाहर आएगी। यह पूरी तरह अदालत के आदेश और मामले की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर क्या कहा गया?
इंटरव्यू में अधिवक्ता ने दावा किया कि नेहा झा के खिलाफ इससे पहले कोई आपराधिक मामला सामने नहीं आया है। उनके मुताबिक, अगर उसका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, तो यह जमानत की सुनवाई में उसके पक्ष में एक पहलू हो सकता है।
हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति आधिकारिक रिकॉर्ड और अदालत की कार्यवाही से ही स्पष्ट होगी।
क्या नेहा को बैग में रखी शराब की जानकारी नहीं थी?
वकील ने एक संभावित कानूनी स्थिति का उदाहरण देते हुए बताया कि किसी व्यक्ति को किसी दूसरे के कहने पर बैग साथ लेकर चलने को कहा जा सकता है। ऐसा भी संभव है कि वह व्यक्ति बैग के अंदर रखी चीजों से अनजान हो।
लेकिन यह केवल एक संभावित परिस्थिति है। नेहा झा के मामले में वास्तव में उसे बैग के अंदर मौजूद शराब की जानकारी थी या नहीं, इसका फैसला जांच में सामने आने वाले सबूतों और अदालत की कार्यवाही से ही होगा।
परिवार को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बातों पर भी सवाल
मामले के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने परिवार या रिश्तेदारों की भूमिका को लेकर भी अलग-अलग दावे किए हैं। लेकिन किसी व्यक्ति को केवल सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा के आधार पर आरोपी नहीं माना जा सकता।
परिवार के किसी सदस्य या रिश्तेदार की भूमिका है या नहीं, यह जांच एजेंसी के सबूतों से तय होगा। इसके बाद अदालत ही यह निर्धारित करेगी कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साबित होते हैं या नहीं।
फिलहाल नेहा झा की जमानत का फैसला अदालत के हाथ में है। बैग की वास्तविक मिल्कियत, CCTV फुटेज, गवाहों और अन्य जांच सामग्री इस मामले में अहम भूमिका निभा सकती है।

