Pandupole Hanuman Temple Fair: राजस्थान के सरिस्का के घने जंगलों में स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर में तीन दिवसीय वार्षिक मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु पहुंचे। 13 सितंबर से शुरू हुआ मेला 16 सितंबर को समाप्त हो रहा है। इस दौरान मंदिर को विशेष फूलों से सजाया गया और कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए।
भीम का अहंकार तोड़ने की मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव अलवर पहुंचे थे। कहा जाता है कि इसी क्षेत्र में हनुमान जी ने भीम का अहंकार तोड़ा था। महाभारत और कई पुराणों में इस प्रसंग का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि भीम ने अपनी गदा से पहाड़ तोड़कर रास्ता बनाया था, जिसे पांडुपोल कहा गया। मंदिर में आज भी हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा विराजमान है।
मेले में राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। यात्रियों की सुविधा के लिए रोडवेज ने 150 से अधिक बसें लगाई थीं।
रोट-चूरमे का लगता है भोग
मंदिर के पुजारी के अनुसार, मेले के दौरान सुबह और शाम समेत दिन में तीन बार हनुमान जी की आरती होती है और भोग लगाया जाता है। उन्हें रोट और चूरमे का प्रसाद चढ़ाया जाता है, जिसे उनकी प्रिय भोग सामग्री माना जाता है। मेले के अवसर पर जिला कलेक्टर की ओर से जिले में अवकाश भी घोषित किया जाता है। श्रद्धालु घरों में ज्योत जलाकर प्रसाद चढ़ाते और हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हैं।
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