Pig Kidney Xenotransplantation India: किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में जानवरों के अंगों को इंसानों में इस्तेमाल करने की दिशा में ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन नई उम्मीद बनकर उभर रहा है। अमेरिका में जेनेटिकली मॉडिफाइड सुअर की किडनी एक मरीज में ट्रांसप्लांट की गई थी, जिसके बाद वह 271 दिनों तक बिना डायलिसिस के रहा। बाद में मरीज का इंसानी किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। फिर भी यह अब तक जीवित इंसान में सबसे लंबे समय तक सफल पिग-किडनी ट्रांसप्लांट का मामला माना जाता है।
भारत में शुरू हुआ काम
इसी दिशा में दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ने अलग ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन विभाग शुरू किया है। वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस क्षेत्र के लिए गाइडलाइंस तैयार करने पर काम कर रहा है। इससे भारत में भविष्य में इंसानों में सुअर की किडनी ट्रांसप्लांट की संभावना बढ़ी है। मार्च 2026 तक देश में करीब 89,839 लोग अंग प्रत्यारोपण की नेशनल वेटिंग लिस्ट में थे। 2025 में रिकॉर्ड 20,138 ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुए। वहीं 2024 में 13,476 किडनी ट्रांसप्लांट हुए, जिनमें 11,558 जीवित और 1,918 मृत डोनर से थे।
जीन में बदलाव से तैयार होगी किडनी
ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन के लिए सामान्य सुअर नहीं, बल्कि जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर तैयार किए जाते हैं। CRISPR-Cas9 जैसी तकनीकों से ऐसे जीन हटाए जाते हैं जो इंसानी इम्यून सिस्टम में तेज प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं। कुछ मानव जीन जोड़कर इम्यून रिस्पॉन्स और खून जमने जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है।
अस्पताल के विभाग के निदेशक डॉ. शिखर त्रिपाठी के मुताबिक, सुअर के अंगों का आकार इंसानों के करीब होता है और उन्हें तेजी से पाला, जेनेटिकली मॉडिफाई और नियंत्रित किया जा सकता है। हाल के वर्षों में रिसर्च ग्रुप और बायोटेक कंपनियां ज्यादा उन्नत जीन-एडिटेड सूअर विकसित कर रही हैं।
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