Vladimir Putin Security Arrangements: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की विदेश यात्राओं के दौरान उनकी सुरक्षा व्यवस्था बेहद गोपनीय रखी जाती है। भारत में होने वाले BRICS Summit 2026 के लिए दिल्ली पहुंचे पुतिन की एयर सिक्योरिटी भी चर्चा में है। उनकी यात्रा में इस्तेमाल होने वाला विशेष Ilyushin IL-96-300PU सामान्य यात्री विमान नहीं है। इसे अक्सर ‘Flying Kremlin’ कहा जाता है।
मौजूदा रिपोर्टों के मुताबिक, पुतिन के विमान के साथ डिकॉय एयरक्राफ्ट की व्यवस्था भी की जाती है। इसका मकसद संभावित हमलावर के लिए यह पहचानना मुश्किल बनाना है कि राष्ट्रपति वास्तव में किस विमान में यात्रा कर रहे हैं।
पुतिन का खास IL-96-300PU विमान क्या है?
पुतिन की लंबी दूरी की यात्राओं के लिए रूस का विशेष रूप से संशोधित IL-96-300PU इस्तेमाल होता है। ‘PU’ रूसी शब्द Punkt Upravleniya से जुड़ा है, जिसका अर्थ कमांड या कंट्रोल प्वाइंट होता है।
यह विमान मूल IL-96-300 का अत्यधिक मॉडिफाइड वर्जन है। इसमें सुरक्षित संचार प्रणालियां और राष्ट्रपति की यात्रा के लिए विशेष सुरक्षा सुविधाएं जोड़ी गई हैं। विमान को रूस की Special Flight Squadron संचालित करती है।
एक जैसे विमान रखने के पीछे क्या है रणनीति?
राष्ट्रपति की सुरक्षा में डिकॉय विमान का इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण सुरक्षा रणनीति माना जाता है। इसमें असली विमान के साथ ऐसे दूसरे विमान भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जिनकी पहचान और बाहरी रूप वास्तविक विमान से मिलते-जुलते हों।
इसका उद्देश्य किसी संभावित हमलावर या निगरानी करने वाले पक्ष के लिए राष्ट्रपति के वास्तविक विमान की पहचान करना कठिन बनाना है। दिल्ली में BRICS Summit के दौरान भी रूसी सुरक्षा व्यवस्था में डिकॉय जेट्स का इस्तेमाल किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
हालांकि, पुतिन की किसी खास उड़ान में वह वास्तव में किस विमान में सवार थे या डिकॉय विमान की सटीक उड़ान योजना क्या थी, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती।
क्या दोनों विमान एक साथ उड़ते हैं?
डिकॉय रणनीति का मूल उद्देश्य ही वास्तविक विमान की पहचान छिपाना है। अलग-अलग यात्राओं में ऐसे विमानों की उड़ान को लेकर तस्वीरें और फ्लाइट-ट्रैकिंग संबंधी दावे सामने आते रहे हैं।
लेकिन सुरक्षा कारणों से रूस की ओर से हर यात्रा में इस्तेमाल किए गए विमानों की सटीक स्थिति, रूट और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल संबंधी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। इसलिए सोशल मीडिया या फ्लाइट-ट्रैकिंग के आधार पर सामने आने वाले हर दावे को आधिकारिक तथ्य नहीं माना जा सकता।
‘Flying Kremlin’ में कितनी खास सुरक्षा है?
IL-96-300PU को सिर्फ एक VIP विमान मानना सही नहीं होगा। इसमें सुरक्षित कम्युनिकेशन और कमांड सिस्टम जैसी सुविधाएं हैं, जिनका उद्देश्य राष्ट्रपति को यात्रा के दौरान भी रूसी सरकारी और सैन्य तंत्र से संपर्क में रखना है।
विमान में आधुनिक सुरक्षा और संचार उपकरणों के अलावा राष्ट्रपति के लंबे सफर को ध्यान में रखकर विशेष सुविधाएं भी मौजूद हैं। इसकी सबसे अहम विशेषताओं में सुरक्षित संचार व्यवस्था को माना जाता है।
क्या पुतिन विमान से परमाणु हमला कर सकते हैं?
पुतिन के विमान को लेकर अक्सर दावा किया जाता है कि इसमें ‘न्यूक्लियर बटन’ मौजूद है और राष्ट्रपति हवा में रहते हुए परमाणु हमले का आदेश दे सकते हैं।
हालांकि, इस तरह की कहानियों में इस्तेमाल होने वाली ‘न्यूक्लियर बटन’ वाली भाषा काफी हद तक सरलीकृत है। वास्तविक परमाणु कमांड व्यवस्था बेहद जटिल और बहु-स्तरीय होती है। सार्वजनिक रिपोर्टों में विमान की सुरक्षित कम्युनिकेशन और कमांड क्षमता का उल्लेख जरूर मिलता है, लेकिन इसके वास्तविक ऑपरेशनल सिस्टम की पूरी जानकारी गोपनीय है।
यानी यह कहना ज्यादा सही होगा कि विमान को राष्ट्रपति के लिए हवाई कमांड और सुरक्षित संचार केंद्र के तौर पर तैयार किया गया है।
कितनी लंबी दूरी तक उड़ सकता है पुतिन का विमान?
IL-96-300 का सामान्य संस्करण करीब 11,000 किलोमीटर तक की रेंज के लिए जाना जाता है। इसकी लंबाई करीब 55 मीटर और विंगस्पैन लगभग 60 मीटर है। विमान में चार PS-90A इंजन लगाए गए हैं।
राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष संस्करण में किए गए बदलावों के कारण इसकी वास्तविक परिचालन क्षमता और मिशन प्रोफाइल की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है।
युद्ध के दौर में और बढ़ जाती है सुरक्षा
रूस-यूक्रेन युद्ध और रूस के पश्चिमी देशों के साथ तनाव के बीच पुतिन की विदेश यात्राओं में सुरक्षा पहले से ज्यादा अहम हो गई है। यही वजह है कि उनके एयर ट्रैवल में विशेष विमान, सुरक्षित कम्युनिकेशन, डिकॉय व्यवस्था और जमीन पर बख्तरबंद वाहनों समेत कई स्तरों की सुरक्षा दिखाई देती है।
दिल्ली में BRICS Summit 2026 के दौरान भी रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए भारतीय एजेंसियों के साथ रूसी सुरक्षा अधिकारियों की संयुक्त व्यवस्था की रिपोर्ट सामने आई है।
इस पूरी व्यवस्था का सबसे अहम उद्देश्य यही है कि पुतिन की लोकेशन, विमान और यात्रा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी संभावित खतरे तक आसानी से न पहुंच सके।

