Thursday, Sep 24

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राहुल गांधी ने संसद परिसर में दिखाई EX जनरल नरवणे की किताब, जानिए किताब में क्या है और बीजेपी क्यों कर रही है इसका विरोध

Rahul Shows Naravane's Memoir: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान सेना के पूर्व चीफ जनरल मनोज नरवणे की किताब 'Four Stars of Destiny' दिखाई। राहुल ने आगे कहा, "मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री आज लोकसभा में आने की हिम्मत करेंगे, क्योंकि अगर वे आए तो मैं उन्हें यह किताब सौंप दूंगा, ताकि वे इसे पढ़ सकें और देश को सच्चाई का पता चल सके।" मालूम हो कि नरणवे की इस किताब से जुड़ी जानकारी पर एक मैगज़ीन में प्रकाशित रिपोर्ट पर संसद में पक्ष-विपक्ष के सांसद एक-दूसरे का विरोध कर रहे हैं। वहीं, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का हवाला देते हुए किताब की प्रति या कथित मैगज़ीन को संसद में दिखाने पर रोक लगा दी है। आइये जानते हैं यह किताब प्रकाशित हुई या नहीं, सैन्य अधिकारियों की लिखी किताबों पर नियम क्या हैं? और किताब में जिक्र किए गए किस विषय का आखिर बीजेपी विरोध कर रही है।

EX- जनरल नरवणे ने किताब में क्या लिखा?

भारतीय सेना के पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने 2019 से 2022 तक सेना में बतौर आर्मी चीफ सर्विस दी थी। उनकी किताब ''Four Stars of Destiny' काफी ज्यादा सुर्खियों में है। इस किताब में उन्होंने अपने करियर, नेतृत्व और खासकर 2020 में भारत-चीन सीमा पर लद्दाख में हुए तनाव के बारे में लिखा है। यह किताब 2024 के दौरान मार्केट में आने वाली थी और प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा प्रकाशित किया जाना था। लेकिन जांच के दायरे में आने के चलते उस वक्त किताब प्रकाशित नहीं की गई।

सेना से जुड़े अधिकारी की लिखी किताब पर क्या नियम हैं?

भारत में पूर्व सैन्य अधिकारियों जैसे पूर्व सेना प्रमुख की किताबों पर सख्त नियम हैं। अगर किसी किताब में संवेदनशील जानकारी हैं तो उसके लिए खास नियम बनाए गए हैं।

सेवारत अधिकारियों के लिए: सेवारत अधिकारियों पर Army Act, Official Secrets Act और Service Conduct Regulations के तहत प्रतिबंध होते हैं। ऐसे में कोई भी सैन्य अधिकारी बिना केंद्र सरकार की अनुमति के सेवा से जुड़ी जानकारी, राजनीतिक मुद्दे या गोपनीय बातें किताब, आर्टिकल या भाषण में नहीं बता सकता है।

रिटायर्ड अधिकारियों के लिए: इनके लिए नियम थोड़े अलग हैं, लेकिन व्यवहार में बहुत सख्ती है। जून 2021 में सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स में संशोधन किया गया, जिनमें बताया गया कि खुफिया या सुरक्षा से जुड़े विभागों में काम करने वाले रिटायर्ड अधिकारी बिना पूर्व अनुमति के अपनी सेवा से जुड़ी जानकारी प्रकाशित नहीं कर सकते है। रक्षा सेवाओं में भी इसी तरह की pre-publication clearance व्यवस्था लागू होती है। रक्षा सेवाओं पर ये नियम सीधे नहीं, बल्कि समान सिद्धांत (spirit) के रूप में लागू होते हैं।

किताब के इस हिस्से का राहुल ने किया है जिक्र

राहुल गांधी ने नरवणे की किताब का हवाला देते हुए कहा कि 31 अगस्त 2020 को डोकलाम में चीनी सेना के 4 टैंक भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे और वे कैलाश रिज तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने दावा किया, 'चीनी टैंक भारतीय सीमा के बहुत करीब आ गए थे, लगभग 100 मीटर तक। उन्होंने आगे कहा, 'पहले राजनाथ सिंह ने उन्हें (नरवणे) कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने जयशंकर जी, एनएसए और राजनाथ सिंह से पूछा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। फिर उन्होंने एक बार फिर राजनाथ सिंह को फोन किया। राजनाथ सिंह ने उनसे कहा कि वह 'शीर्ष' से पूछेंगे। 'शीर्ष' का स्टैंडिंग ऑर्डर था कि अगर चीनी सेना आती है, तो हमें बिना इजाजत के उन पर गोली नहीं चलानी चाहिए। नरवणे जी और हमारी सेना उन टैंकों पर गोली चलाना चाहती थी, क्योंकि वे हमारे इलाके में घुस गए थे।'

बीजेपी ने किताब का जवाब किताब से दिया

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, "आज संसद में किताब बनाम किताब। राहुल गांधी जी के एक किताब के बदले 100 किताबें लेकर संसद भवन आया। नेहरू गांधी परिवार के मक्कारी का इतिहास देश के सामने आना चाहिए।" वहीं, सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की भारत विरोधी सोच साफ झलकती है। विपक्ष के कई चेहरों पर उस समय खुशी दिखाई दी थी, जब अमेरिका ने भारत पर टैरिफ बढ़ाया था, लेकिन जब भारत-अमेरिका ट्रेड डील ऐतिहासिक रूप लेने जा रही है, तब विपक्ष को खुश होना चाहिए था। इससे पहले संसद में गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के बयान को खारिज कर दिया और कहा कि जो किताब छपी ही नहीं उस पर संसद में चर्चा नहीं की जा सकती है।

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