Saudi Aramco Oil Supply India: भारत की रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर नई चुनौती सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको ने भारतीय रिफाइनरियों को कच्चे तेल की आपूर्ति फिलहाल रोक दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी की पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन पर हुए हमलों के बाद कंपनी ने अगली सूचना तक सप्लाई रोकने की जानकारी दी है।
लाल सागर और होर्मुज से भी सप्लाई पर रोक
रिपोर्ट के मुताबिक, अरामको ने लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य दोनों रास्तों से कच्चे तेल का निर्यात रोक दिया है। होर्मुज से तेल की आपूर्ति ईरान युद्ध के कारण पहले से प्रभावित है, जबकि लाल सागर के आसपास हूती विद्रोहियों की मौजूदगी से समुद्री मार्ग पर भी दबाव बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका असर भारत को मिलने वाली सऊदी तेल की तय कॉन्ट्रैक्ट सप्लाई पर पड़ा है और फिलहाल भारतीय रिफाइनरियों को निर्धारित मात्रा में कच्चा तेल नहीं मिल रहा है।
छूट पर खरीदा तेल होर्मुज के रास्ते भारत पहुंचाने की तैयारी
रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने कुछ ‘स्पॉट कार्गो’ यानी तत्काल डिलीवरी वाले कच्चे तेल के लॉट ऐसे ट्रेडर्स को बेचे हैं, जिनके जरिए इन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचाने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि ये ट्रेडर्स भारी छूट पर इराकी कच्चा तेल खरीदकर उसे होर्मुज से होते हुए ओमान की खाड़ी तक ले जाएंगे। इसके बाद भारतीय और अन्य ग्राहकों तक तेल पहुंचाने के लिए कार्गो को एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर किया जा सकता है।
भारतीय रिफाइनरियों पर बढ़ रहा लागत का दबाव
सऊदी अरब से सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारतीय रिफाइनरियों को दूसरे स्रोतों से कच्चा तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे तेल और ढुलाई दोनों की लागत बढ़ने की संभावना है। टैंकरों का किराया भी पहले से रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब है, जिससे आयात का खर्च बढ़ रहा है। वहीं, रूसी कच्चे तेल पर मिलने वाली छूट भी कम हो गई है या लगभग खत्म हो गई है, जो पहले भारतीय रिफाइनरियों के लिए एक अहम वैकल्पिक स्रोत था। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से कच्चे तेल की खरीद पर लागत का दबाव और बढ़ गया है। वहीं, हूतियों के ड्रोन हमले के बाद सऊदी की अहम पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन प्रभावित हुई है। होर्मुज बंद होने की स्थिति में यह पाइपलाइन सऊदी के लिए वैकल्पिक तेल मार्ग थी, जिससे रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था।

