Friday, Sep 25

होम = News Latest = सुप्रीम कोर्ट का आदेश, मासिक धर्म पर छुट्टी देने की याचिका खारिज, ये 5 अहम बातें महिलाओं को जानना जरूरी

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, मासिक धर्म पर छुट्टी देने की याचिका खारिज, ये 5 अहम बातें महिलाओं को जानना जरूरी

by | Mar 13, 2026 | News Latest, देश

Menstrual Leaves Supreme Court: देशभर में कामकाजी महिलाओं को मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान छुट्टी देने की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह मामला सरकार और संबंधित नीतियों के तहत विचार करने योग्य है, न कि न्यायपालिका के निर्णय का विषय। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे इस मुद्दे को सरकार के पास ले जाएं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं और रोजगार के संदर्भ में कुछ अहम टिप्पणियां भी दी हैं, जिनसे इस विवादित विषय पर बहस तेज हो गई है।

  1. महिलाओं को कमजोर दिखाने का खतरा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं, यदि कानूनन लागू कर दी जाएँ, तो इससे महिलाओं के कामकाजी वातावरण में कमजोर या कमतर होने का भ्रम पैदा हो सकता है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यह सोच बन सकती है कि मासिक धर्म महिलाओं के लिए किसी तरह का नकारात्मक या असामर्थ्य का संकेत है।

  1. नौकरी पर असर पड़ने की संभावना

CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अगर पीरियड्स लीव को अनिवार्य कर दिया गया, तो कंपनियां महिलाओं को जिम्मेदारी वाले पदों पर नियुक्त करने से बच सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि यह महिला कर्मचारियों के करियर पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

  1. नीति बनाना सरकार का काम

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि महिलाओं को छुट्टी देने का फैसला न्यायपालिका नहीं कर सकती। इसके लिए संबंधित सरकारी विभागों को सभी पक्षों की राय लेकर नीति तैयार करनी होगी। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस विषय पर विचार करें और सही पॉलिसी बनाएं।

  1. उदाहरण और बहस पर कोर्ट की प्रतिक्रिया

याचिकाकर्ता की ओर से केरल और कुछ प्राइवेट कंपनियों के उदाहरण प्रस्तुत किए गए, जिनमें पीरियड्स लीव दी जाती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानूनन बाध्य करने से न सिर्फ निजी सेक्टर बल्कि न्यायपालिका और सरकारी नौकरियों में भी महिलाओं के अवसर सीमित हो सकते हैं।

  1. याचिका किसने दायर की?

इस याचिका को शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया था। उनका तर्क था कि महिलाओं को मेटरनिटी लीव का प्रावधान है, तो पीरियड्स के दौरान भी उन्हें छुट्टी मिलनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि सभी राज्यों को इस पर कानून बनाने का निर्देश दिया जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और नीति बनाने का जिम्मा सरकार को सौंपा।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद महिलाओं के अधिकार और रोजगार में समानता की बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्दा केवल कानून का नहीं, बल्कि सामाजिक और व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी गंभीर है।

ये भी पढ़ें: KKR कप्तान रहाणे ने दिया इस्तीफा! IPL 2026 से पहले उड़ी हलचल, सच आया सामने